रविवार, 5 जनवरी 2020

खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है


खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है
नहीं और है कोई मां रेणुका माता है

                      सेर (1)
रहती है धूम बड़ी भारी,माता की जय जय गाते हैं मंदिर को खूब सजाते हैं , भक्ति में हम खो जाते इक्कीस  अगस्त का इंतजार , हमएक साल से करते हैं
यह तिथि है मां के जन्मदिन की ,हम मां का जश्न मनाते
                    
                            अंतरा
१)मॉ दिखलाये जल्वा ,ये ऐसा मंदिर है ये शक्तिपीठ हमे ,लगे स्वर्ग सा सुंदर है
प्यारा है गांव धामन ,तीरथ बन जाता है
खुशियों से जहां .  .      .......... 

                        सेर-(2)
लेकर के धर्म का नाम कुछ लोग अधर्म जो करते  कलयुग के बगला भगत हैं ये अंजाम से भी नही डरते हैं
मानवता मर्यादा भूले और अहंकार में डूबे हैं
सबके दिल मे मॉ प्रेम जगा, तेरे दुखी भक्त ये कहते हैं

                  अऩ्तरा-2
ढोंगी बाबाओं से भक्तों को बचा ले मां
कुछ भक्त भी हैं ढोगी ,तु उनको सजा दे मॉ
तु अंतर्यामी है, तू जग कि ग्याता है
              खुशियो से जहॉ.......
             
                         सेर-3
हर वर्ष यहां पर ,पॉच दिनों घट की स्थापना होती है
औऱ पॉच दिनो तक भक्तो की ,बडी कड़ी साधना होती है
कल तक जो एक भिखारी था इस दर से बऩा उद्योगपति
वर उसको वैसा ही देती मां जिसकी जो भावना होती है

                  अंतरा :- 3
हर चैत के महीने में रहता है बड़ा मेला होती है भीड यहां भक्तों का मचा रेला
निरंजन जो आता है ,वह पुण्य कमाता है
         खुशियों से जहां......

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