हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी
सुनकर भक्तों छलक उठेंगे आंखों से पानी
1----------
परशुराम से एक दिन बोले जमदग्नि मुनिवर
मानोगे मेरी आज्ञा न होगा कोई प्रश्न उत्तर
सुनकर न करना इंकार, पिता का रखना मान
होगा मेरा तिरस्कार ये बात तू रखना ध्यान
खेलेगी किस्मत कैसा खेल, न परशुराम ने जानी
हैं मां रेणुका ____________
2-----------
परशुराम बिन सोचें बोले, निभाऊंगा वचन
पालन करके आज्ञा का, होगा मन मेरा उपवन
मुनिवर बोले परशुराम, अपना शस्त्र उठाओ
अपनी तुम माता का शीश धड़ से अलग कर जाओ
पुत्र का हो गया हृदय घात, सुनकर पिता की वाणी
है मां रेणुका ___________
3----------
यह सोचकर थर-थर कांपे, पुत्र परशुराम
होगा कैसे काम अनर्थ, चरण है जिनके धाम
मन ही मन में बह रही, अश्रु की तेज धारा
इस विधि के विधान ने यह क्या लिख डाला
वक्त के आगे हार गए, बड़े बड़े महाज्ञानी
है मां रेणुका ____________
4------------
जीवन बन गई एक पहेली, कैसे सुलझाऊं
मां के मैं प्राण बचाऊं,या दिया वचन निभाऊं
मुझको मां करना क्षमा, हालात से मजबूर
हो जाएगा घोर पाप क्या था मेरा कसूर
उठाया शस्त्र मां के प्रति, पिता की आज्ञा मानी
हैं मां रेणुका परशुराम _____________
5--------------
परशुराम से मुनिवर बोले, मैं हूँ अति प्रसन्न
क्षण भर भी देर न की, पूरा तुमने किया वचन
पितृ भक्ति बड़ी महान्, मांगो तुम वरदान
सुनलो पिता करुण पुकार, दो मां को जीवनदान
बस यही है विनती मेरी, करदो मेहरबानी
हैं मां रेणुका परशुराम ____________
6-------------
परशुराम मां रेणुका की, दे ये सीख घटना
विवाद मातृ पितृ का बिन जाने पक्षन तोलना
सोचें समझें न देना तुम कोई भी वचन
बाद मे पछताओगे, न लौटेगा वो क्षण
गांठ बांध लो भक्तों ना करना कभी नादानी
हैं मां रेणुका परशुराम-----------
गीतकार - कीर्ति पाहुजा
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर


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