शनिवार, 11 जुलाई 2020

सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

🌺🌺🙏🙏🙏*।। देवी जस ।।*🙏🙏🙏🌺🌺

सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
 तेरी जय जयकार भवानी, तेरी जय जयकार माँ - k
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
जगदम्बा मैय्या घट घट बसो रे ... 
घट घट बसो रे मैय्या पूजे सकल संसार रे ...
जगदम्बा मैया हो..
======= मुखड़ा ========

विंध्यवासिनी जब हुई राज़ी ।।
मेहंदी गाँव में आन बिराजी ।।
हारी जीत गये सब बाज़ी ... तेरी जय जयकार माँ 
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

विन्ध्याचल में है ज्योती तुम्हारी ...
ज्योती तुम्हारी मेहंदी गाँव हुआ उजियार रे ...
 विंध्याचल मैया हो...
===== पहला अंतरा ======

चोला बदल बदलकर आये ।।
बाल युवा वृद्धा बन जाये ।।
आँखों वाला चक्कर खाये ... तेरी जय जयकार माँ ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

कोराड़ी वाली अम्बा जगदम्बा ...
अम्बा जगदम्बा मैय्या करती अजब सिंगारे रे ...
जगदम्बा मैया हो....
===== दूसरा अंतरा ======

चार दिवारी से है घेरा ।।
बीच किले में डाली डेरा ।।
अटल भवानी राज है तेरा ... तेरी जय जयकार माँ ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

नगरधन में है आसन तुम्हारो ...
आसन तुम्हारो मैय्या धारे जगत का भार रे ...
भवानी मैया हो.....
====== तीसरा अंतरा =====

तेजराम पर दया करी माँ ।।
पाया शिवगौरी की प्रतिमा ।।
गढ़ पर्वत पर गूँजी महिमा ... तेरी जय जयकार माँ  ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जय कार माँ

पटगोवारी है माँ की  नगरिया...
माँ की नगरिया गौरा शिव संग करत संसार रे ...
शिवगौरी मैया हो...
====== चौथा अंतरा ======

जो ये चार धाम हो आये ।।
निश्चित चारों फल पा जाये ।।
दुर्गाप्रसाद सदा गुण गाये ... तेरी जय जयकार माँ ..
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ 

अशरण को तुम्हीं देतीं शरण माँ ...
 देतीं शरण माँ मैं भी आया हूँ तेरे दरबार रे ...
विन्ध्याचल मैया हो.....
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ 3k
===== पाँचवाँ अंतरा =====

लेखक : संदीप करोसिया
           *श्यामसरोज*
निर्माता, निर्देशक :दुर्गाप्रसाद धनोले
            📲-7709506291

भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव

रुणुक झुणूक माँ विंध्यवासिनी, आगई मेहँदी गावं
भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव - 2

विन्ध्याचल की विंध्यवासिनी, मेहँदी गावं की शान हो
भक्तों को दर्शन देकर माँ, करती जग कल्याण हो
पर्वतराज का मान बढ़ाकर - 2 आई मेहँदी गावं
भक्तों को तारण बैठी माँ, नीम की थंडी छाव - 2

हुआ अवतार योग मात का, विंध्य गिरी मे छाई
पूजित हुई संसार में माता, अष्‍टभुजा कहलाई
एक दिवाने भक्त की खातिर - 2 पहुची मेहँदी गावं
भक्तों को तारण बैठी माँ, नीम की थंडी छाव-2

पावन हो गई गाव की धरती, जबसे चरण पडे माँ
दुर्गा दुर्गती दूर करो माँ, दुर्गा दास कहे माँ
कर स्विकार माँ आरती - 2 और दे आचल की छाव
भक्तों को तारण बैठीं माँ, नीम की थंडी छाव-2

रुणुक झुणूक माँ विंध्यवासिनी, आगई मेहँदी गावं
भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव - 2

गीतकार : रवि शंकर सोनी
निर्देशक  :दुर्गाप्रसाद धनोले 📲-7709506291
विशेष सहयोग - धर्म प्रचार प्रसार मंच 

विंध्यवासिनी मन्दिर मेहन्दी गाथा - भजन गायिका चांदनी शर्मा

मेहँदी गाव मे सजा है दरबार, भगत आये दूर दूर से-2
हो बैठी विंध्यवासिनी मैया आसन मार, भगत आये दूर दूर से

1_पेंच नदी किनारे बसा ये, मेहंदी गाव निराला
भक्तों को मन मोहक लगे, मैया तेरा दिवाला
झंडा लहर लहर लहराया , किसने मंदिर तेरा बनाया
हो किया हम भक्तों पे बड़ा उपकार, भगत आये दूर दूर से....

2_ग्रामवासियों ने मिलकर के, मंदिर भव्य बनाया
शाकम्भरी नवरात्री शुभ दिन, तोरण द्वार सजाया
माँ का करके अर्चन वंदन, शिव के प्राथ्रीक लिंग का पूजन
हो सतचंडी यज्ञ किया है अपार, भगत आये दूर दूर से......

3_शोभा यात्रा निकली माँ की, भक्तन भीड़ है भारी
घट स्थापन कर भक्तों ने, बोले जय जय कारी
पूजे सात दीप नौ खंड, ज्योति प्रज्वलित माँ की अखंड
हो किया मैया जी का भक्तों ने शृंगार, भगत आये दूर दूर से...

4_दूज तीज और चौथ पंचमी, भक्तन ने जल ढारे
छटे सप्तमी तिथि अष्टमी,  माँ के निकले जवारे
हवन पूजन कर आरती वंदन, सबको तिलक लगाके चंदन
हो कन्या भोजन का लगाया भंडार, भगत आये दूर दूर से...

5_नवमी तिथि विसर्जन बेला, माँ के निकले जवारे
कासी टेकडी पेंच नदी के, पोहचे घाट किनारे
माँ का लेकर आशीर्वाद, भक्तों पाओ महाप्रसाद
हो कल कल कर ती जाये पेंच नदी की धार, भगत आये दूर दूर से...

6_शाकम्भरी नवरात्री तबसे, भक्त यहा है मनाते
विंध्यवासिनी माँ के दर से, मनकी मनोती पाते
करलो भजन कीर्तन गान, जीवन का करने कल्याण
हो बाजे ढोल नगाड़े मैया जी के द्वार, भगत आये दूर दूर से

7_मेहंदी गाव की गाथा लिखकर, मन मेरा हरसाया
दुर्गाप्रसाद धनोले जी ने, सारा हाल सुनाया
विनती करता है बेनाम, बुलवा ले माँ अपने धाम
हों मनकी मनसा माँ करले स्विकार,भगत आये दूर दूर से


गुरुवार, 9 जुलाई 2020

माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है - भजन गायक रवि सोनी

मुझे मेरे मुस्किल का - 2, हल मिल गया है ! 
माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है !

मिटणे लगी है चिंता मन की. ढाल बनी माँ घर आंगण की !
भक्तों को भक्ति का - 2, फल मिल गया है !

कोण है खुश किस आँख मे पानी, माँ तो जाने सबकी कहानी!
मैया के चरणों का - 2, घर मिल गया है!

माँ को पास मे ले आयेंगी, प्रार्थना खाली ना जाएंगी ! 
भक्ती के गीत को - 2, असर मिल गया है! 

दुःख मे साथी चंद मिलते है , हर दरवाज़े बंद मिलते है!
हरपल खुला माँ का - 2, दर मिल गया है!

मुस्किल कुछ नहीं तेरे लिये माँ, तू ही सब कुछ मेरे लिये! 
जिंदगी के नाव को - 2, सफर मिल गया है! 

दुर्गाप्रसाद को देता सहारा, स्वर्ग से साचा द्वार तुम्हारा ! 
जयंत को आने वाला - 2, कल मिल गया है!