रविवार, 5 जनवरी 2020

हें मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी


मां रेणुका देवी की गाथा
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी -२
ब्राह्मण कुल की जननी माता -२
भक्तन की हितकारी %
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी
हे प्यारे भक्तों आज हम आपको माता रेणुका की पावन गाथा सुनाने का प्रयास कर रहे  हैं इस गाथा को श्रीमान रविन्द्र मानकर जी ने धामनगाँव रेणुका माता की प्रेरणा और आशीर्वाद से कई पुराणों से गुथकर एक माला में पिरोया है और गोविंद बेनाम ने जिसे शब्दों की डोर से बांधा है मां रेणुका के चरणों में यह माला समर्पित है आशा करते हैं आप सबको पसंद आएगी ।
             बोलो रेणुका माता की जय
1.कन्नौज राज में गधी नाम के राजा करते थे शासन
सत्य धर्म के थे प्रतिपालक दुखियों के दुख करते हरण
सत्यवती थी जिनकी कन्या रूप,रंग, गुण खान वली
भृगुवंशी ऋचिक राजा,कर विवाह वह संग चली
बाबुल का घर अंगना छूटा -२,छुटी सखियॉ सारी
                  हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

महाराज ऋचिक सत्यवती को विवाह कर अपनी चरण कुटी पर ले आते हैं और अपने गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं सत्यवती की सेवा भाव से महाराज ऋचिक अति प्रसन्न होते हैं और उनसे वरदान मांगने को कहते हैं

2. सत्यवती फिर कहने लगी आपको हो घट घट के वासी
उदय हुए प्रभु भाग्य हमारे आई बनकर के दासी
मेरी मॉ को पुत्र हुये ना, गोदी मां की है खाली
पुत्रवती का वर दे करके स्वामी कर दो खुशहाली
सुनकर के प्रार्थना सत्यवती की-२ कहने लगे तपधारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

महाराज ऋचिक ने सत्यवती की प्रार्थना सुनकर उन्हें फल स्वरुप दो चरू प्रदान किये। एक उनके लिए और एक उनकी माता के लिए,सत्यवती की माता के मन में अति तेजवान पुत्र की लालसा थी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी वाला चरू खा लिया औऱ अपना वाला चरू उसे दे दिया

3. खाकर करके प्रसाद हरि का मन आनंद रहा छाये
  कुछ ही समय पर मां बेटी ने सुंदर दो ललना जाय़े
जिसके भाग्य में जो लिखा है उसको वो मिल जाता है
सूखे सरोवर में भी भक्तों कमल पुष्प खिल जाता है
हरि की लीला हरि ही जाने क्या जाने संसारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

हे प्यारे भक्तो सत्यवती की मां के गर्भ से ब्राह्मण तेज वाले बालक ने जन्म लिया जो आगे चलकर विश्वामित्र के नाम से विख्यात हुये।

4.ऋचिकराज और सत्यवती के अंगना फूली फुलवारी
जमदग्नि रूप में आए ब्राह्मण भूषण तपधारी
सप्तर्षियों में जिनकी गणना आगे चलकर के आई
वेद पाठ और यज्ञ हवन कर तरुण अवस्था को पाई
दूर-दूर तक जिनकी महिमा-२ गाए नर और नारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

ऋचिक महाराज सत्यवति से कहते हैं हे प्रिय आपने अपनी माता का चरू ग्रहण किया है इसलिए उनमें क्षत्रिय वाला तेज रहेगा और क्रोधी स्वभाव हमेशा रहेगा और संतान के रूप में स्वयं भगवान विष्णु अवतार लेंगे
5. प्रसेनजित राजा के घर में महाशक्ति ने जन्म लिया

  रेणुका नाम रखा कन्या का हरिभक्ति ने जन्म लिया
  कऱती तपस्या बालापन से युवा अवस्था को पाई
  जमदग्नि की पत्नी बनकर भृगुकुल में हैं आई
पति सेवा और प्रेम नेम से-२ डोर प्रीत की डारी
    हे मात रेणुका गाये हम महिमा

जमदग्नि और रेणुका माता हिमालय से भ्रमण करते हुए हरियाणा पहुंचे कुछ समय वहां बिताया , माता रेणुका पति सेवा में दिन रात लगी रहती थी ।

6. पॉच पुत्र की बन गई माता जग से नाता जोड़ लिया
जिनके प्रेम में श्री विष्णु ने नींज वैकुंठ को छोड़  दिया
जमदग्नि के घर आंगन में झूल रहे हरिहर झुलना
द्वितीय राम बनकर के आय़े रेणुका माता के ललना
भृगुवंश में बजी बधाई-२ आए गर्भ …………..
       हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

माता रेणुका की पॉच संताने उत्पन्न हुई इनमें से सबसे छोटे विष्णु के अवतार परशुराम कहलाते हैं अपने दादा रिचिक और पिता जमदग्नि से इन्होंने वेदपाठ और अस्त्र शस्त्र विद्या का अध्ययन किया और भगवान शंकर को अपना गुरु बना कर वरदानों की प्राप्ति की ।

7. तज हरियाणा की भूमि को मध्यप्रदेश में आन रमें
जानापाव में बना आश्रम अपना बिताने लगे समय
दिन प्रति दिन क्षत्रिय राजाओं का बढ़ने लागा अत्याचार
इसलिए तो रेणुका नंदन बनके हरि ने लिया अवतार
शिव के साधना के है साधक ब्राह्मण कुल अवतारी
   हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

महर्षि जमदग्नि अपनी पत्नी और पांच पुत्रों के साथ जानापाव ग्राम में अपना आश्रम बनाकर भगवान का भजन करते हुए अपना समय बिताने लगे और माता रेणुका अपने पांच पुत्रों का पालन पोषण करते हुए पतिव्रत धर्म का पालन करती चली गई

8. माता रेणुका थी प्रतिव्रता सदा पति का ध्यान करें
कामधेनु थी जिनके गृह में  मनचाहा नित दान करे
एक दिन रिसीवर कहे पत्नी से जाओ जल लेकर आओ
भोग लगाने इष्टदेव को ताजे फल लेकर आओ
चली रेणुका जल लेने को -२ विधि गति टरे न टारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

जब माता रेणुका जल  लेकर के वापस आ रही थी तो उनकी दृष्टि सरिता के किनारे जलक्रीडा करते हुए चित्ररथ गंधर्व पर पड़ी जो अप्सराओं के साथ काम को उत्तेजी कर रहा था जिसे देखकर मॉ रेणुका ध्यान मग्न हो गई

9. देख दशा गंधर्व रति का ,तन की सुधबुध है  छुटी
रेणुका मां की सर की गगरिया सुनो अचानक है फूटी
जिसका पाप लगा माता को ऋषिवर मॉ से रूठ गए
जन्म-जन्म के रिश्ते नाते आज अचानक टूट गए
क्रोध रूप में बोले रिसीवर-२ मार मार किलकारी
      हे मात रेणुका गाय हम महिमा

तुम्हारी महर्षि जमदग्नि ने मा रेणुका को आश्रम के बाहर ही रोक दिया और अपने पुत्रों से कहने लगे तुम्हारी माता कुलघातनी है इसका इसी समय वध कर दो यह सुनकर चारों पुत्र रोने लगे और पिता से छमा याचना करने लगे औऱ क्या  कहने लगे

10 .ये है हमारी जननी माता इनसे प्यार दुलार मिले
जिसका दूध पिया है हमने उस पर ना तलवार चले
जमदग्नि ने जल लेकर के चारों पुत्रों पर मारा
मूर्छित पड़े धरन पर लेटे प्रबल क्रोध की है धारा
खड़ी रेणुका रोय़े सिसककर-२ बेटो की महतारी
      हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

माता रेणुका किलप किलप कर रो रही है हाय मेरे लालो को मैने इसी दिन के लिये पाला था,  हे प्राणनाथ आप हमारे प्राण ले लीजे ,पर मेरे पुत्रो को जीवनदान दे दीजे स्वामी , हे भगवान , हे ईश्वर , मेरे पुत्रो की रछा करे ।

11. परशुराम जब आए गृह को, देख दशा बेहाल हुये
    जमदग्नि है बड़े क्रोध मे, जिनके नैना लाल हुये
   चारों भाई पडे पृथ्वी पर, माता रेणुका रोए रही
दिल की हिचकी थमे न थामे, असुवन से मुख धोए रही
हाथ जोडकर कहे पिता से-२ परशुराम प्रण धारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

परशुराम जी अपने पिता से पूछते हैं -हे पिताश्री मेरे भाइयों ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया  जो आज उनकी यह दशा हुई परशुराम की बात सुनकर जमदग्नि कहने लगे हे पुत्र उन्होंने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया इनकी माता दुराचारिणी है अकेले मे गन्धर्वो के साथ इसका मेलजोल है इसलिए मैंने उनसे कहा कि अपनी माता का सिर काट दे पर इन्होंने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया और इस मरण अवस्था को पहुंच गए अगर तुमने भी मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया तो तुम्हारा भी यही हाल होगा

12. मान पिता की आज्ञा सुत ने , अपना झुका ललाट दिया
जिसने जन्म दिया उस मॉ  का ,एक पल में सिर काट दिया
ठंडी छाती हुई पिता की , होठों पर आई मुस्कान
परशुराम से कहने लागे, बेटा माँग लेव वरदान
पितु भक्ति तेरी देखके लालन -२ हुई प्रसन्नता भारी
    हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

पिताश्री के वचन सुनकर परशुराम जी कहते हैं - हे पिता श्री आप हमें कितने वरदान दे सकते हैं जमदग्नि खुशी के मारे कहने लगे -बेटा, तुम्हें जितने वरदान मांगना है उतने मांग लो, मैं तुम से अति प्रसन्न हूं , परशुराम क्या कहने लगे:-

13.  हाथ जोड़कर कहे पिता से ,माता को जिंदा कर दे
करके कृपा अपने  लालन पर , मुझको यह पहला वर दे
मेरे चारों भाई पड़े हैं , इनकी मुर्छा दुर करे
क्रोध छोड़कर सुनिए पिताजी ,हम सब के दुख दर्द हरे
परशुराम की यही है विनती -२ हरिये विपत हमारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

महर्षि जमदग्नि मृत्यु संजीवनी मंत्र के जानकार थे उन्होने परशुराम के वचन मानकर माता रेणुका को फिर से जीवनदान दिया और उनके चारों पुत्रो को मूर्छा से मुक्त कर दिया यह देख कर सारे ऋषि , मुनि गण  उनकी जय जयकार करने लगे
               बोलो भृगुनंदन महर्षि जमदग्नि की जय
               बोलो रेणुका नंदन परशुराम महाराज की जय

14.परशुराम जी कहे माता से, माता भाग्य जगा दीजे
क्यो गंधर्वो से मिलने गई थी ,सारा हाल बता दीजे
भृगुवंश की परंपरा का,  दूर-दूर तक लेख मिले
पतिव्रता और सती नारी का , सत्य जमाना देख भी ले
अपने पुत्र की सुन मृदु वाणी  -२ खुश हो गयी महतारी
   हे मात रेणुका गाये  हम गाथा तुम्हारी

माता रेणुका परशुराम से कहने लगी हे-हे राम मेरे पिता इच्छ्वाकु वंश के राजा थे हमारे राज्य की तलहटी में गंधर्वो  का राज्य था गंधर्व अति सुंदर होते हैं किंतु तलहटी के पानी में एक विशेषता है कि उम्र ढलते ढलते ही इन लोगों में कुष्ठ रोग पनपने लगता है मेरा वंश सुर्य  उपासक था,  भगवान भास्कर की कृपा से कुष्ठरोग की औषधि मेरे पिता जानते थे उन के बाद यह ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ।

15. कुष्ठरोग था गंन्धर्वो को , दशा देख मैं घबराई
उनका दुख हरने की खातिर , मिलने का वर दे आई
रोगी का मै रोग मिटाने, मन में अपने रहम गई
मगर तुम्हारे पिता श्री का ,क्रोध देख मैं सहम गई
इसके बाद  हुआ क्या बेटा-२,  बिसरी बातें सारी
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

माता रेणुका की बातें सुनकर महर्षि जमदग्नि अपने किए पर बहुत पछताते हैं औऱ अपनी  पत्नी से कहते हैं -मुझे क्षमा करें -देवी मै आपके भाव को नही समझ सका और आपके ऊपर  क्रोध कर बैठा ।
16. मात रेणुका की यह गाथा, जो भी भक्ता ध्यान करें
कुष्ठ रोग और चर्म रोग से मॉ उनका कल्याण करें
भृगुवंश की  धर्म पताका , देश देश में लहराई
ब्राह्मण कुल की जननी माता ,मात रेणुका कहलाई
परदेसी बेनाम सदा मॉ-२, तेरे चरणों में बलहारी
     हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

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