माँ अम्बादेवी आल्हा ...
श्री गणेश का सुमिरन करके, मां अम्बे का ध्यान लगाय ।
मात सरस्वति तुम्हे मनाऊं , मेरे कंठ विराजो आय ।
भुल चुक जो भी हो जाये , करना माता क्षमा प्रदान ।
मां अंजनी के राज दुलारे , पहरे पर बैठे हनुमान ।
मंगला देवी तुम्हे मनाऊ , रखना माता मेरी शान ।
हे देवन के देव महादेव , रखना लाज मेरी भगवान ।
कथा सुनाउ मां अम्बे की , सुनियो श्रोता चतुर सुजान ।
लिखवे नाम बनावे आल्हा , महिमा चांदनी रही बखान ।
(2)
मातेश्वरी अम्बा माई की , गाथा सुनलो ध्यान लगाय ।
सतपुडा पर्वत पर है बिराजी , धारुड वालीमात कहाय।
शिव के ससुर थे दक्ष प्रजापति ,यज्ञ दिये थे शुरु करवाय ।
नही निमंत्रण शिव को भेजे ,ये अपमान सहा न जाय ।
सती कुद पडी हवन कुण्ड मे , यज्ञ दियो विध्वंस कराय ।
सती शव लेके शिवजी धुमे , सतपुडा पर्वत पर है आय ।
अंग सती के गिरे धरनी पे , तब से धारुड धाम कहाय ।
जै जै कार हो अम्बे मां की ,भगत सभी है ध्यान लगाय ।
(3)
म.प्र बैतुल जिले मे , बैठी माता आसन मार ।
सारे जगत मे तेरी मैया ,होय भवानी जै जैकार ।
गुफा के अन्दर बैठी हो अम्बे ,करके मां सोलह सिंगार ।
मंगला मां की बनी समाधि ,जिनको पुजे सब नर नार ।
भक्त कहे मां राधा जिनको ,मां शक्ति का है अवतार ।
जिनके गुरु श्री सुरदास थे ,उनसे शिक्षा मिलि अपार ।
शिवधाम मे बैठके गुरुवर ,भक्ति का करते संचार ।
धारुड आठनेर मे गुंजे ,मां राधे की जै जैकार ।
(4)
भक्ति की शक्ती बडी मैया , करती राधे मां हरसाय
जंगल बियाबान मे धुमे , कैसी लिनी लगन लगाय ।
प्यास लगी इक दिन मैया को , पानी कही नजर ना आय ।
बिन पानी के मां राधे का , चेहरा रहा देख मुरझाय ।
एक गुफा दिखलाई उनको , राधे मां गई है हरसाय ।
मन ही मन मे सोच रही है , यहाँ पानी पीने मिल जाय ।
पहुची गुफा के अन्दर मंगला , देख अचम्बा गई चकराय।
बैठी गुफा मे अम्बे रानी, जिसकी महिमा कही ना जाय ।
(5)
मां अम्बे के दर्शन करके , मन अन्तर की बुझ गई प्यास।
ऐसी मोहित भई मैया पे, पानी बिन जो रही हतास।
इसी गुफा मे करती ,भुल गई है दिन और रात ।
ऐसी लगन लगी मैया से , मैया चारो तरफ दिखात।
1970 की भक्तो तुम्हे सुनाती हुँ मै बात ।
कृपा करी जगदम्बा मैया , जिनकी महिमा कही न जात ।
राधे मां की भक्ती देखकर , मां की शक्ति गई समाय ।
तेज बडा मस्तक पे इतना , जिसकी प्रसंशा की ना जाय ।
(6)
कई वर्षौ तक करी तपस्या ,अपने मन मे धीरज धार
अन्न का दाना छोड़ दिया है,फल पत्तो का किया आहार ।
राधे मां को दर्शन देने , आ गई अम्बे सिंह सवार ।
दर्शन करके जगदम्बा के , मंगला बोली जै जैकार ।
कहन लगी जगदम्बा मैया , बेटी सुन ले वजन हमार ।
तेज जन्म हुआ है मंगला , जन-जन का करने उध्दार ।
जो भी इस दरबार मे आये , उसकी सुनना करुण पुकार ।
दुखियो के दु:ख दर्द मिटाना ,भक्तो के भरना भण्डार
(7)
गाय चराने को आते थे , दुर दुर से यहाँ पे ग्वाल ।
इक दिन प्यास लगी ग्वाले को , पानी की करे तलाश ।
इसी गुफा मे पहुच गया है ,जल की मन मे लेकर आस ।
राधे मां को देख के ग्वाला ,करने लगा है अरदास ।
कहाँ से आई हो तुम मैया,किसकी बैठी ध्यान लगाय ।
सारा हाल सुना राधा मां , उस ग्वाले से कहा समाझाय।
सारी गाथा सुनकर ग्वाला ,अपने गाँव गया है आय।
गांव-गांव मे पीट डिंढोरा ,घर घर सबको रहा बताय।
(8)
सावंगी और हिवरा गांव के , जुडने लागे भक्त तमाम।
केशो भाई चले है देखो , राधे मां का लेते नाम ।
गोंडी घोघरा के नरनारी बोलत , चल दिये जै जैकार ।
पावन गुफा के पाये दर्शन , माता का कीन्हा दीदार ।
मां मंगला के संग भक्तो ने गुप्त गुफा मे किया प्रवेश ।
मां अम्बे के करके दर्शन , कट गये सबके कठिन कलेश।
देख के भक्ति मां राधे की , दिन दुना फैला परचार ।
म.प्र.बैतुल जिले में , होवे मां की जै जैकार ।
(9)
राधे मां ने करने यात्रा ,अपने मन मे ली है ठान ।
चली है तीरथ करने मैया ,हाथ धर्म का लिये निशान।
एक सरोवर मिला मैया को ,बैठे जहाँ शंकर भगवान ।
श्री गणेश और पार्वती की ,प्रतिमा सुन्दर मिली महान ।
कुछ ही दुर मे काली मां का ,सुन्दर मिला एक स्थान ।
फल फुलो का लगा बगीचा ,जिसकी कही न जाये ना शान।
उस बगीचे मे बैठे साधू , माता का कर रहे थे ध्यान ।
मंगला को उन साधु ने ,अभय दे दिया वरदान ।
(10)
ऐसी पावन गुफा की भक्तो ,गाथा तुमको दई सुनाय ।
मंगला माता बडी तपस्वी ,राधा माता बोली जाय।
इस मन्दिर मे अमावस पुणो ,होती भक्तो भीड़ अपार।
दुर दुर से नर और नारी आकर करते है दीदार ।
जिसकी जो भी मनोकामना ,यहां पर आ पुरी हो जाय ।
उसकी भर जाती है झोली ,जिसने ली है लगन लगाय।
रहत कडोंदा और कटंगा , माता दई बेनाम बनाय।
राधा मां का नाम सुमरके ,चांदनी सबको दई सुनाय।
जय अम्बादेवी