बुधवार, 11 दिसंबर 2019

नगरकोट महारानी रेणुका


नगरकोट महारानी रेणुका
आये शरण तुम्हारी माँ
        ...... रेणुका मैया हो

1) धामनगाँव बना अलबेला
   रोज लगे भक्तगण का मेला
   परशुराम महतारी रेणुका
    आ गये शरण तुम्हारी माँ

रेणुका मैया तोरे अंगना रे
तोरे अंगना रे भवन के भंडार रे
 रेणुका मैया हो
 नगरकोट महारानी रेणुका
आ गये शरण तुम्हारी माँ

2) अम्बादेवी धारूड वाली
   आष्टा नगर की मैया काली
  होवे जय जयकार भवानी
आ गये शरण तुम्हारी माँ

मोरी अम्बा मईया तोरे लाने रे
तोरे लाने रे लाये चुनरी भवानी गोटेदार
मोरी अम्बा मैया हो
आ गये शरण तुम्हारी माँ

3)  जल प्रवाह बनकर लहराई
   सूर्यपुत्री ताप्ती महारानी
  वेग लिये अति भारी भवानी
  आ गये शरण तुम्हारी माँ
  मोरी ताप्ती मैया बनके जल की धारा
 बनके जल की धारा मुलताई से निकली
 मोरी ताप्ती मैया हो

4) ग्राम चिचोलि की चण्डी माई
  दुवारे लाल ध्वजा लहराई
  करते जय जय कार भवानी
  आ गये शरण तुम्हारी

मोरी चन्द्रपुत्री  पूर्णा नदी माँ
पूर्णा नदी माता भैसदेही मे बनो दरबार रे
मोरी चन्द्रपुत्री माँ

  5) बारहलिंग दिखे ना दूजा
    यहाँ राम जी कर गये पूजा
    संग मे जानकी दुलारी भवानी
    आये शरण तुम्हारी माँ
    मोरे भोले बाबा तोरी महिमा से
   तेरी महिमा से परदेसी ना जाने बेनाम रे
   मोरे भोले बाबा रे

भजन गायक - रवि सोनी जबलपुर 
गीतकार - गोविन्द बेनाम 

खेल रही मेरी अम्बा भवानी - सिंगर चांदनी बघेल



रंग रंग के फूल खिले तरह तरह कि क्यारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में


चम्पा में है चण्डी मईया , केसर में बैठी काली
जूही में है छिन्नमस्तीका मोगरे में मोहगढ़ वाली
लाखो दैत्यों कों मारा जिसने बस इक किलकारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी ने हर फुलवारी ने

कमलपुष्प में कमलादेवी ईख में ईच्छापुर वाली
सूरजमुखी में सरस्वती लाजवंती में त्रिपुरारी
घ्यान भक्त कों तारा मां ने ज्वाला किरपानी रे
खेल रही मेरी अम्बा भवानी


धारूल में अम्बा माई , धामन में है रेणुका माई
चौरासी माई पर्वत पर और मुम्बई में मुम्बा माई
भक्त सुधाकर ले लो माँ अपनी शरणागत
खेल रही मेरी अम्बा माई हर पुलवारी में


रंग रंग के फूल खिले तरह तरह कि क्यारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में

गीतकार - सुधाकर पंडाग्रे ( भोपाल )

माई का डंका बाजे रे - चांदनी बघेल देवी भजन


भजन गायिका चांदनी बघेल 
 
निर्देशक रविन्द्र मानकर

डंका डंका डंका  अरे डंका बाजे रे
माई कों डंका बाजे रे
सतपुड़ा पहाड़ी पर माई कों डंका बाजे रे

महिमा महिमा महिमा
मां कि महिमा अति भारी रे
धारूड पहाड़ी पर माई कों सिंह दहाड़े रे
सतपुड़ा पहाड़ी पर माई कों डंका बाजे रे

महिषासुर मारा रे जिसने दानव संहारा रे
ओर अभय दिया देवोl कों जिसने दिया सहारा रे

मारा मारा मारा रक्तबीच कों मारा रे
सतपुड़ा पहाड़ी पर माई कों डंका बाजे रे

मंगला माँ ने ध्यान लगाया दर्शन मैया कों पाया रे
नगर नगर और सारे नगर कों पार लगाया रे

हारा हारा हारा शुम्भ निशुम्भ भी हारा रे
सतपुड़ा पहाड़ी पर अम्बा माई विराजे  रे

गीतकार - सुधाकर पंडागरे 

सोमवार, 2 दिसंबर 2019

धानी चुनरिया ओढ़ी है मैया

धानी चुनरिया ओढ़ी है मईया
माथे पर बैंदी सितारो भरी

अ ररर मईया रण में चली
अ ररर मैया रण में चली

योगी अति मुनि जन्मो से तरसे
कब आवोगे मईया हमारी गली
अ ररर मईया रण में चली 2

आगे है हनुमत पीछे है भैरव
बीच में मईया जी कि डोली सजी
अ ररर मईया रण में चली 2

मैया कि महिमा है बड़ी न्यारी
रविन्द्र कि विनती सुनो भगवती
अ ररर मईया रण में चली
अ ररर मईया रण में चली

खेल रही मेरी अम्बा भवानी

रंग रंग के फूल खिले तरह तरह कि क्यारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में


चम्पा में है चण्डी मईया , केसर में बैठी काली
जूही में है छिन्नमस्तीका मोगरे में मोहगढ़ वाली
लाखो दैत्यों कों मारा जिसने बस इक किलकारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी ने हर फुलवारी ने

कमलपुष्प में कमलादेवी ईख में ईच्छापुर वाली
सूरजमुखी में सरस्वती लाजवंती में त्रिपुरारी
घ्यान भक्त कों तारा मां ने ज्वाला किरपानी रे
खेल रही मेरी अम्बा भवानी


धारूल में अम्बा माई , धामन में है रेणुका माई
चौरासी माई पर्वत पर और मुम्बई में मुम्बा माई
भक्त सुधाकर ले लो माँ अपनी शरणागत
खेल रही मेरी अम्बा माई हर पुलवारी में


रंग रंग के फूल खिले तरह तरह कि क्यारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में

रविवार, 1 दिसंबर 2019

माँ अम्बादेवी आल्हा


माँ अम्बादेवी आल्हा ...
श्री गणेश का सुमिरन करके, मां अम्बे का ध्यान लगाय ।
मात सरस्वति तुम्हे मनाऊं , मेरे कंठ विराजो आय ।
भुल चुक जो भी हो जाये ,  करना माता क्षमा प्रदान ।
मां अंजनी के राज दुलारे , पहरे पर बैठे हनुमान ।
मंगला देवी तुम्हे मनाऊ , रखना माता मेरी शान ।
हे देवन के देव महादेव , रखना लाज मेरी भगवान ।
कथा सुनाउ मां अम्बे की , सुनियो श्रोता चतुर सुजान ।
लिखवे नाम बनावे आल्हा , महिमा चांदनी रही बखान ।
(2)
मातेश्वरी अम्बा माई की , गाथा सुनलो ध्यान लगाय ।
सतपुडा पर्वत पर है बिराजी , धारुड वालीमात कहाय।
शिव के ससुर थे दक्ष प्रजापति ,यज्ञ दिये थे शुरु करवाय ।
नही निमंत्रण शिव को भेजे ,ये अपमान सहा न जाय ।
सती कुद पडी हवन कुण्ड मे , यज्ञ दियो विध्वंस कराय ।
सती शव लेके शिवजी धुमे , सतपुडा पर्वत पर है आय ।
अंग सती के गिरे धरनी पे , तब से धारुड धाम कहाय ।
जै जै कार हो अम्बे मां की ,भगत सभी है ध्यान लगाय ।
(3)
म.प्र बैतुल जिले मे , बैठी माता आसन मार ।
सारे जगत मे तेरी मैया ,होय भवानी जै जैकार ।
गुफा के अन्दर बैठी हो अम्बे ,करके मां सोलह सिंगार ।
मंगला मां की बनी समाधि ,जिनको पुजे सब नर नार ।
भक्त कहे मां राधा जिनको ,मां शक्ति का है अवतार ।
जिनके गुरु श्री सुरदास थे ,उनसे शिक्षा मिलि अपार ।
शिवधाम मे बैठके गुरुवर ,भक्ति का करते संचार ।
धारुड आठनेर मे गुंजे ,मां राधे की जै जैकार ।
(4)
भक्ति की शक्ती बडी मैया , करती राधे मां हरसाय
जंगल बियाबान मे धुमे , कैसी लिनी लगन लगाय ।
प्यास लगी इक दिन मैया को , पानी कही नजर ना आय ।
बिन पानी के मां राधे का , चेहरा रहा देख मुरझाय ।
एक गुफा दिखलाई उनको , राधे मां गई है हरसाय ।
मन ही मन मे सोच रही है , यहाँ पानी पीने मिल जाय ।
पहुची गुफा के अन्दर मंगला , देख अचम्बा गई चकराय।
बैठी गुफा मे अम्बे रानी, जिसकी महिमा कही ना जाय ।
(5)
मां अम्बे के दर्शन करके , मन अन्तर की बुझ गई प्यास।
 ऐसी मोहित भई मैया पे, पानी बिन जो रही हतास।
इसी गुफा मे करती ,भुल गई है दिन और रात ।
ऐसी लगन लगी मैया से , मैया चारो तरफ दिखात।
1970 की भक्तो तुम्हे सुनाती हुँ मै बात ।
 कृपा करी जगदम्बा मैया , जिनकी महिमा कही न जात ।
राधे मां की भक्ती देखकर , मां की शक्ति गई समाय ।
तेज बडा मस्तक पे इतना , जिसकी प्रसंशा की ना जाय ।
(6)
कई वर्षौ तक करी तपस्या ,अपने मन मे धीरज धार
अन्न का दाना छोड़ दिया है,फल पत्तो का किया आहार ।
राधे मां को दर्शन देने , आ गई अम्बे सिंह सवार ।
दर्शन करके जगदम्बा के , मंगला बोली जै जैकार ।
कहन लगी जगदम्बा मैया , बेटी सुन ले वजन हमार ।
तेज जन्म हुआ है मंगला , जन-जन का करने उध्दार ।
जो भी इस दरबार मे आये , उसकी सुनना करुण पुकार ।
दुखियो के दु:ख दर्द मिटाना ,भक्तो के भरना भण्डार
(7)
गाय चराने को आते थे , दुर दुर से यहाँ पे ग्वाल ।
इक दिन प्यास लगी ग्वाले को , पानी की करे तलाश ।
इसी गुफा मे पहुच गया है ,जल की मन मे लेकर आस ।
राधे मां को देख के ग्वाला ,करने लगा है अरदास ।
कहाँ से आई हो तुम मैया,किसकी बैठी ध्यान लगाय ।
सारा हाल सुना राधा मां , उस ग्वाले से कहा समाझाय।
सारी गाथा सुनकर ग्वाला ,अपने गाँव गया है आय।
गांव-गांव मे पीट डिंढोरा ,घर घर सबको रहा बताय।
(8)
सावंगी और हिवरा गांव के , जुडने लागे भक्त तमाम।
केशो भाई चले है देखो , राधे मां का लेते नाम ।
गोंडी घोघरा के नरनारी बोलत , चल दिये जै जैकार ।
पावन गुफा के पाये दर्शन , माता का कीन्हा दीदार ।
मां मंगला के संग भक्तो ने गुप्त गुफा मे किया प्रवेश ।
मां अम्बे के करके दर्शन , कट गये सबके कठिन कलेश।
देख के भक्ति मां राधे की , दिन दुना फैला परचार ।
म.प्र.बैतुल जिले में , होवे मां की जै जैकार ।
(9)
राधे मां ने करने यात्रा ,अपने मन मे ली है ठान ।
चली है तीरथ करने मैया ,हाथ धर्म का लिये निशान।
एक सरोवर मिला मैया को ,बैठे जहाँ शंकर भगवान ।
श्री गणेश और पार्वती की ,प्रतिमा सुन्दर मिली महान ।
कुछ ही दुर मे काली मां का ,सुन्दर मिला एक स्थान ।
फल फुलो का लगा बगीचा ,जिसकी कही न जाये ना शान।
उस बगीचे मे बैठे साधू , माता का कर रहे थे ध्यान ।
मंगला को उन साधु ने ,अभय दे दिया वरदान ।
(10)
ऐसी पावन गुफा की भक्तो ,गाथा तुमको दई सुनाय ।
मंगला माता बडी तपस्वी ,राधा माता बोली जाय।
इस मन्दिर मे अमावस पुणो ,होती भक्तो भीड़ अपार।
दुर दुर से नर और नारी आकर करते है दीदार ।
जिसकी जो भी मनोकामना ,यहां पर आ पुरी हो जाय ।
उसकी भर जाती है झोली ,जिसने ली है लगन लगाय।
रहत  कडोंदा और कटंगा , माता दई बेनाम बनाय।
राधा मां का नाम सुमरके ,चांदनी सबको दई सुनाय।
जय अम्बादेवी

राम के सेवक आज्ञाकारी - ताप्ती भजन

हे पवनपुत्र प्रणहारी राम के सेवक आज्ञाकारी

वन वन में भटकते रघुनन्दन सतपुड़ा शिखर पर आते है
पितरों का तर्पण करने कों ताप्ती मैया में डुबकी लगाते है 

ताप्ती जन्मोत्सव की बधाई - शहनाज अख्तर

 सूर्यलोक में आये है देने बधाई देव
मां छाया पिता भास्कर लेव बधाई लेव


भक्तों बधाई है बधाई है  4
ताप्ती जनम की खुशियाँ छाई है

दर्शन कों देव सभी आये है
छाया माता से अर्जी लगाए है  2
लाए उपहार सभी लाए है  2
मन में आनन्द कों समाए है 2
जग तारण बिटिया तुमने जाई है

भक्तों बधाई है बधाई है

माँ ताप्ती के तट पर जो आते है
दर्शन से पाप धूल जाते है  2
मन की मुरादें माँ से पाते है 2
बेनाम दीप जो जलाते है 2
शहनाज तेरी महिमा गाई है

भक्तों बधाई है बधाई है


सूर्यसुता वरदानी है
इनसा ना जग में कोई प्राणी है 2
वेदों ने महिमा जो बखानी है 2
सुर नर गंधर्वो जो मानी है 2

यम और शनिचर जिसके भाई है

भक्तों बधाई है बधाई है