रविवार, 5 जनवरी 2020

धामनगांव में सजा है दरबार भगत आये दूर दूर से



धॉमनगॉव मे सजा है दरबार ,भगत आय़े दुर दुर से
होवे रेणुका माता की जय जयकार
भगत आय़े दुर दुर से
1. शिखर सतपुडा की भूमि पर, धॉमनगॉव पुराना।
वियावान जंगल मे भक्तो , मंदिर बना सुहाना।।
कैसे आई रेणुका मात , रखने भक्तो की पल भात
हो मॉ का किसने किया है सिंगार
      भगत आय़े दुर दुर से

२.सन्१८६५मे मॉ ने सोते भाग्य जगाई
बल्लू मरघडे के सपने मे मात रेणुका आई
बीजा सेमल के दरम्यान मेरा वही बना स्थान
हो पृथ्वी खोद के मुझे लेना निकार
   भगत आय़े दुर दुर से

३.भोर भई तो बल्लु भगत ने, सबको बात बताई
  बीजा सेमल वृछ के नीचे करने चले खुदाई
निकली मॉ की मुरत न्यारी जयजयकार करे नरनारी
हो माता रेणुका को रहे जल डार
    भगत आय़े दुर दुर से

४.दुर दुर से मॉ की महिमा सुनकर भगत है आते
मात रेणुका की चौखट पर ,अपनी विनय सुनाते
सुनती है उसकी अरदास ,जो करता मॉ पे विश्वास
हो भऱती निर्धन का भवानीभण्डार
    भगत आय़े दुर दुर से

५. कुछ स्वार्थी भक्तो के मन मे  देखो लालच आया
माता की मुरत के नीचे  खुब गडी है माया
इऩको लोक लाज ना आई चोरी चोरी करे खुदाई
मातारानी ने दिखाया चमत्कार
   भगत आय़े दुर दुर से

६.चोर खुदाई जहॉ करते थे ,बिछे मटर के दाने
देख प्रकोप भवानी मॉ का , चोर लगे घबराने
अैसा लगा हृदय आघात , रास्ता मिला ना पुरी रात
रेणुका मॉ ने कराया गिरफ्तार
 भगत आय़े दुर दुर से

७.लालच के अन्धो को मॉ ने , ऐसा रंग दिखाया
हुये अपंग अंग से पापी गई सम्पति माया
मॉ से जो करता है बैर उसकी नही जान की खैर
हो मॉ की माया का ना पाया कोई पार    
   भगत आय़े दुर दुर से

८. कुछ भक्तो ने निर्णय करके , नई एक मुरत लाई
संगमरमर की उस मुरत को मंदिर मे बैठाई
देखो बन ना सका संयोग महामारी का फैला रोग
हो गुनिया बैगा डॉक्टर गये सब हार   
   भगत आय़े दुर दुर से

९.फिर से पुरानी प्रतिमा मॉ की मंदिर मे बैठाई
महामारी के रोग से भक्तो  सबने मुक्ति पाई
लेते माता जी का नाम बल्लु भगत गये सुरधाम
हो लहु भगत बन गये मॉ के खिदमदगार
भगत आय़े दुर दुर से

१०.लहू भगत के बाद मे भक्तो  गंगा घर है आये
मेजर ,सखाराम के संग मे  मॉ की भक्ती पाये
१९सौ २४ का आगाज  अंग्रेजो का जब था राज
हो अफसर मैया जी के पहुचे दरबार -भगत आय़े दुर दुर से

११.देख चढोत्री धन माया को अफसर है चकराने
माता के मंदिर मे देखो कब्जा लगे जमाने
मुझको रह रह आता याद कई वर्षो तक चला विवाद
हो जीते सखाराम शासन गया हार
   भगत आय़े दुर दुर से

१२.सन् १९ सौ ८३ मे फिर से विपदा आई
गौली बाबा नाम का लोभी करने लगा खुदाई
कैसा समय लगा विप्रित कट गया धड से मॉ का शिस
हो गॉवगॉव मे मचा है हाहाकार
 भगत आय़े दुर दुर से

१३.भक्तो ने थाने मे जाकर मिलकर रपट लिखाई
मानकर मुंशी जी ने भक्तो इसकी करी सुनवाई
धर्म आस्था का कर ख्याल चलने लगी जॉच पडताल
हो पकडे गयेजो थे मॉ केगुनहगार
     भगत आय़े दुर दुर से

१४. दोनो आरोपी को भक्तो जेल पडा फिर जाना
मॉ का सर अभिलेखागार बैतूल किया है रवाना
भक्तो के मन मे सुजा बिना शिस के हो ना पुजा
हो मिल के करने लगे ,सोचविचार
   भगत आय़े दुर दुर से

१५.सिंदुर सिर बना मैय्या का कर दी प्राण प्रतिष्ठा
जीनने ये अपराध किया था उनकी हुई भिनिष्ठा
कुड कुड मरे जेल मे जाये इनकी व्यथा कही ना जाये
हो जाकर गिरे है नरक के द्वार 
भगत आय़े दुर दुर से

१६.फिर १९सौ ८३ मे मॉ ने लीला दीखाई
विश्वकर्मा जी के सपने मे कन्या रूप मे आई
मॉ ने अपनी कृपा बरसाई सारी बीती बात बताई
हो पापीयो ने किया कैसा अत्याचार 
भगत आय़े दुर दुर से

१७.फिर देवी मॉ कहने लगी तन सिर के बिन प्यासा
मुझको धॉमनगॉव भिजाकर पुरी कर दे आशा
निॆद खुली तब होश मे आये  विश्वकर्मा जी गये घबराये
हो मित्र सोनी जी से बोले है विचार 
भगत आय़े दुर दुर से

१८.गये अभिलेखागार मे दोनो खोल पोटली देखी
मॉ के सिर के हो गये दर्शन औऱ पत्रिका लेखी
मालवीय जी के जाकर पास सारा खोल दिया इतिहास
हो पुजा अर्चन ,वन्दन किय़े बारम्बार 
भगत आय़े दुर दुर से

१९. एक समिति गठित करी है सबसे हाथ मिलाके
उत्तमराव ,आनन्दराव को अपने साथ मिलाके
भक्तगणो को लेकर साथ सुपुर्दनामा लेकर हाथ
हो चले मैय्या जी की करते जयजयकार
भगत आय़े दुरदुर से

२०.मैय्या का सि लेकर के भक्त चले झुमते गाते
सरकारी अभिलेखागार से बन्धन मुक्त कराके
चले सब मॉता के स्थान देखो करते हुये गुणगान
हो चारो ओऱ गुजे मॉ की जयजयकार
भगत आय़े दुर दुर से

२१.धॉमनगॉव मे कई माह से गिरा नही था पानी
होने लगी जोर से बारिश आई जब माता भवानी
छाई चारो तरफ खुशहाली सुखे मे हो गयी हरियाली
हो मॉ ने अपना दिखाया चमत्कार
          भगत आय़े दुर दुर से

२२.३१तारीख ८वॉ महिना  सन् १९सौ बावन
   मात रेणुका की जत्रा का दिन आया अति पावन
ऱेणुका खापा ,सीताढाना धॉमनगॉव को हुये रवाना
हो भीड जुटने लगी मंदिर मे अपार
भगत आय़े दुर दुर से

२३.मॉ के प्यारे भक्तो ने मॉ से कभी ना नाता तोडा
दुजा धड बनाके फिर से मॉ के शिस को जोडा
सबपे करती है करूणाई तीन रूप मे बैठी माई
हो सबका भरती है मॉ खाली भण्डार
  भगत आय़े दुर दुर से

२४. चैत्र मास की पावन बेला मिलकर खुशियॉ मनाते
   परदेशी बेनाम सदा मॉ तेरी महिमा गाते
सब भक्तो से तेरा नाता ब्राह्मण कुल की हो जननी माता
हो सबकी सुनती हो करूण पुकार
भगत आय़े दुर दुर से

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