ना डर है किसी भी अंजाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
है विष्णु के अवतारी
करे क्रोध भयंकर भारी
डंका बजता ( 3) है इनके नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
1) जमदारा से गए कैलाश , परशुराम शिव के पास
शिव से विद्या शक्ति पाए , फिर वो जमादारा आये
परशुराम आश्रम आये , वो पिता से आदेश पाए
कांटो शीश अपनी माता का , ना टाला आदेश पिता का
नहि पूछे वो 2 कारण इस काम
चला फरसा श्री परशुराम का
2) अगले पल छाया सन्नाटा ,शीश अपनी माता का काँटा
साबित परशुराम ने कर दी , अपनी सच्ची पितृ भक्ति
बोले पिता है परशुराम , मांगो जो चाहे वरदान
सच्ची मेरी पितृ भक्ति , दों भाई को श्राप मुक्ति
दान माँ मैं 2 माँ के जीवनदान का
चला फरसा श्री परशुराम का
3) रेणुका जमदग्नि के बीच , शक की दीवार डाली खीच
सहस्त्रअर्जुन ने शक करवाया , गुस्सा परशुराम को आया
नैनुका अपने पति की जान , परशुराम से मांगे दान
परशुराम दे जीवनदान , नैनुका के बेटे बेईमान
कर दी हत्या जमदग्नि की , कामधेनु ना देने का इंतकाम था
चला फरसा श्री परशुराम का
4) माँ रेणुका शोक मनाये , परशुराम को बतलाए
सहस्त्रअर्जुन के बेटे सारे , तेरे पिता के है हत्यारे
रेणुका माँ को दुःख अपार , छाती पिटी 21 बार
परशुराम भरे ललकार , माई मैं भी 21बार
हाँ मिटा दूंगा 2 वंश छत्रियो के नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
5) जमादारा महू निराला , इनका इतिहास मतवाला
यहां धरती के नीचे जाकर , चुप गए सहस्त्रअर्जुन आकर
कोई जतन काम ना आये , परशुराम से बच ना पाए
परशुराम ने पलटी धरती , हत्या उस राजा की कर दी
हाँ हुआ जश्न सर पे इंतकाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
गीतकार - जयंत सांखला ( देवास )

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