सोमवार, 27 जनवरी 2020

माँ रेणुका देवी अमृतवाणी

भक्तों तुमने तो अनेक पावन कथा होगी । भोले भंडारी की,  कलकत्ते वाली की,  राधे श्याम की,  सिया राम की । पर जो आज पावन कथा मै तुमको सुनाने जा रहा हूँ वह सबसे भिन्न है, अनुपम है। मां दुर्गा की  अवतारी, मां रेणुका के, अवतरण की कथा बड़ी मनोरम है। तो आओं प्रिय भक्तों मां रेणुका का गुणगान करे।सच्चे मन से उनका ध्यान धरे।

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नमो नमः ×4, 
नमो नमः मां रेणुका × 4
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
पावन तेरी अमृतवाणी,  सबके मां संकट हरो
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

1-------------

जगदंबा की तू अवतारी,  तेरी महिमा न्यारी है 
आदि शक्ति सिद्ध स्वरूपा,  पूजे सृष्टि सारी है
सूरज में मां तेज तुम्हारा,  चंद्र में शीतल छाया है 
कण-कण में मां तेरा जलवा, तेरा रूप ही पाया है 
वृक्ष लता सब पौधे मां,  तुझसे फ़ले फूले है
धरती अम्बर और तारे, तुम बिन मां अधूरे है 
जगमग तेरी जोत नूरानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका × 4
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मां रेणुका का पूर्व जन्म में अदिति था। अदिति शिव जी की उपासक थी । उन्होंने कई वर्षों तक शिव जी की आराधना तपस्या की। अदिति के जप-तप से प्रसन्न होकर शिव जी उन्हें कई वरदान दिए।

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2---------------

पूर्व जनम मे रेणुका ने, नाम अदिति पाया था।
कईं वर्षों तक कर तपस्या शिव भोले को मनाया था ।
राई को पर्वत कर देती,  तू मां बड़ी निराली है।
गागर में सागर भर देती,  तेरी कीर्ति न्यारी है ।
अपनी ममता का खजाना,  भक्तों पे लुटाती हो ।
जो भी तुझको शीश झुकाता, उसकी बिगड़ी बनाती हो ।
सब पर है तेरी मेहरबानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

माँ रेणुका ने पूर्व जन्म  अदिति रूप में कई वरदान प्राप्त किए। पहला वरदान उनको यह मिला कि प्रभु हरि का छठवां अवतार तुम्हारी कोख से जन्म होगा ।
जग मे तुम्हारी अत्यधिक  मान- प्रतिष्ठा  होगी।  तुम्हे इकवीरा के नाम से भी जाना जाएगा ।

3------------

शिव से वर माँ तुमने पाया , जग में मान पाओगी 
प्रभू हरी ले कोख से जन्म , इकवीरा कहलाओगी 
दुखियों के तू कष्ट निवारे , तू माँ सुखदाई है 
भवसिंधु से पार उतारे , सबकी तू सहाई है 
जीवन में हो जितनी उलझन , उसको तुम सुलझाती हो 
जो माँ तेरा ध्यान धरे , संकट से उसे बचाती हो 
तेरी शक्ति सबने मानी , मां रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4
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मां रेणुका का जन्म इक्ष्वाकु वंशीय राजा रेणु के महल में हुआ । राजा रेणु की दो पुत्रीया थी ,  रेणुका और बेणुका। दोनो पुत्री रूपमती थी। राजा को अपनी धन दौलत का अहंकार था। एक दिन राजा ने अपनी पुत्रियों से प्रश्न किया कि तुम किसका दिया खाती हो। बेणुका के उत्तर से राजा रेणु अत्यधिक प्रसन्न हुए क्योंकि बेणुका ने कहा पिताजी मैं आपका दिया खाती हूँ । पर रेणुका का उत्तर सुनकर अत्यधिक क्रोधित हुए क्योंकि रेणुका ने कहा पिताजी मैं परमात्मा का दिया हुआ अपने नसीब का खाती हूँ ।प्रतिकार स्वरूप राजा ने बेणुका का विवाह पराक्रमी राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन से किया और रेणुका का विवाह निर्धन तपस्वी भृगुवंशीय मुनि जमदग्नि से किया ।

4-----------------

राजा रेणु की तू पुत्री,  जमदग्नि तेरे स्वामी है 
घट घट में मां तू समाई, तू मां अन्तर्यामी है
तू चाहे तो बंजर मे, हरियाली लहराती है 
सूखे सरवर मे भी मां,  तू ही फूल खिलाती है
पत्थर को पारस कर देती,  तेरी शक्ति अपार है
जो मां तेरी माला जपता, उसका मां उद्धार है
जग कहता तुमको कल्याणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

अदिति को शिव जी से  दूसरा वरदान यह मिला कि कलयुग में तुम्हे महादेवी के रूप मे पहचाना जाएगा ।
कुल देवी के रूप मे तुम्हारी पूजा की जाएगी । तुम्हे कुल स्वामी भी कहा जाएगा ।तुम्हारी आराधना करने से विधवा भी सुहागन हो जाएगी। तुम सदा नारी की लाज बजाओगी। तुम सबकी मनोकामना पूर्ण करोगी।

5------------

कलयुग में देवी की देवी , मैया तुम कहाती हो 
कुलदेवी के रूप में माँ , तुम तो पूजी जाती हो 
सतियों के तु सत संवारे , सबकी लाज बचाती  है 
विधवा को तु मंगली करती ,आस का दीप जगाती है
मंगल करती सारे काज , अमंगल तुम हरती हो 
जो माँ करता तेरा पाठ , कामना पूरी करती हो 
जग में ना तुमसा वरदानी,मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

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मां रेणुका को पांच पुत्रो की प्राप्ति हुई । शिव जी के वरदान अनुसार पांचवे पुत्र परशुराम जो प्रभु हरि के छठवे अवतार के रूप मे जाने जाते है। उनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हुआ था। जिस तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है ।परशुराम तेजस्वी  पराक्रमी थे।

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परशुराम की तू है माता , सबकी तू हितकारी है
लाचारो को देती सहारा , भक्तों को रखवाली है 
सुखे नीरज जीवन में माँ , तुम ही बहार लाती हो
गम के बादल दूर भगाती , खुशियाँ तुम बरसाती हो
करुणा की माँ निर्मल धारा , तेरे चरणो बहती है 
करता जो माँ तेरा चिंतन , उसे न चिंता रहती है
तुमको सेवत ब्रम्हाज्ञानी  ..माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

मां रेणुका को अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है । अन्नपूर्णा माता का हृदय सागर से भी विशाल है । अन्नपूर्णा माता की कृपा से सबके भंडार भरे रहते हैं । माता की दया दृष्टि जिस पर हो वो कभी भूखा नही सो सकता । माता पल भर मे ही निर्धन को धनवान बना देती है । अन्नपूर्णा मां के चरणो मे मेरा कोटि कोटि प्रणाम ।

(बोलो रेणुका माता की जय)

7------------------------

अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा , जग का पालन करती हो
अन्न धन के सबके माता , तुम भण्डार भरती हो
भुक्षुक को सम्राट बना दे , तेरी अजब ये माया है
निर्बल को दे अपना बल , प्रेम सुधा बरसाया है 
तेरा जो अर्चन करता, वो सुख समृद्धि पाता है 
आनन्द वैभव देने वाली , कर्ज से मुक्त हो जाता है 
तु हि माँ सम्पति की दानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

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रेणुका झील की गाथा बड़ी पावन है। प्रबोधिनी एकादशी की पूर्व संध्या पर यहाँ मेला भराता है। कहां जाता  हैं कि भगवान परशुराम अपनी मां रेणुका से आशीर्वाद लेने यहाँ आते हैं। माता और पुत्र को समर्पित यह मेला पूरे विश्व में अनूठा कहा जाता है। यहां रेणुका झील के किनारे भगवान परशुराम एवं मां रेणुका का मंदिर भी स्थित है। 


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हिमाचल में झील रेणुका, जिसकी पावन गाथा है 
दोष रोग से मुक्त हो जाता, जो भी डुबकी लगाता है
तेरे माता इशारे से , कंकर मोती बनते है 
रेगिस्तान में भी माँ , उपवन ख़ूब महकते है 
सुख का होता नया सवेरा , दुःख की शाम ढलती है 
श्रध्दा सुमन जो अर्पण करता , उसकी झोली भरती  है
देरी गाथा वेद बखानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

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मां रेणुका के देश भर मे कई शक्ति पीठ है। मां का रूप अति सुन्दर है। मां रेणुका के दर्शन मात्र से ही मन प्रफुल्लित हो जाता है,  सुख शांति का आभास होता है ,जीवन संवर जाता है । तीनों लोक मे माता का गुणगान होता है। मां की पावन जोत से तीनो लोको मे उजाला फैला हुआ है। जो भक्त माता का पूजन अर्चन करता है। वो भव सागर से तर जाता है ।

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चन्द्र सा तेरा रूप चमके,  मुख माँ बड़ा विशाल है 
नयन है तेरे मोटे लाल , बोंहें माँ विकराल है 
तेरा दर्शन जो भी करता, भव से वो तर जाता है 
लाख चौरासी योनियों से , वो माँ मोक्ष पाता है 
विकट डगर में माँ रेणुका , जिसने तुम्हे पुकारा  है
जीवन के पग पग में माँ ,  तूने उसे संभाला है
सिमरन करते सारे प्राणी, माँ रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4 

परशुराम ने विवश होकर अपने पिता की आज्ञा का पालन किया ।उन्होंने अपनी माँ रेणुका का शीश धड़ से अलग कर दिया । परशुराम के पिता जमदग्नि मुनिवर पुत्र की आज्ञा के पालन अति प्रसन्न हुए । जमदग्नि मुनिवर ने फ  स्वरूप उनको वरदान मांगने को कहा  तो परशुराम वरदान स्वरूप कुछ भी मांग सकते थे। पर माँ तो माँ होती है और माँ का स्थान इस जग मे कोई दूजा नही पा सकता। इसलिए परशुराम ने वरदान मे अपनी माँ रेणुका का पुनर्जीवन मांगा। जमदग्नि मुनिवर ने परशुराम की इच्छा पूर्ण की और माँ रेणुका को पुनर्जीवन दिया । जमदारा की दैविक भूमि पर यह घटना घटित हुई । माँ रेणुका के बहते रक्त ने पाषण का रूप धर लिया । और आज यहाँ  माँ रेणुका की भव्य मंदिर सजा हुआ है। दूर-दूर से भक्त श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं । और इच्छा फल प्राप्त करते हैं 


10------------------

होकर परशुराम विवश, अपना वचन निभाते हैं 
अपनी माँ का शीश धड़ से , खुद ही अलग कर जाते है
माता के बहते रक्त ने,  वहां पत्थर रूप धारा है 
धन्य हो गई वो धरती,  जहाँ मां का मंदिर प्यारा है 
माटी को चंदन कर देती,  लोहा कंचन करती हैं 
करता जो  ही मां का किरतन, किस्मत उसकी बदलती है 
तेरी लीला सबने जानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

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मां रेणुका का हृदय कोमल है। वह अपने भक्तों पर, बच्चों पर अपार ममता लुटाती है। जो इनकी शरण मे आ जाता है उसे हर संकट से बचाती है। हे प्राणी मोहमाया से छूटकर मां की लगन लगाले। अपने जीवन की डोर मां को सौंप दे।  तेरे जीवन कश्ती की पतवार है मां । वो तुझे कभी बींच भंवर मे न डोलने देगी। अपना संपूर्ण जीवन मां की सेवा मे लगाले।

11--------------------

इधर उधर क्यूँ भटकें प्राणी,  मां की शरण में आजा रे
टूट जाए सांसो की माला  , कब किसने यह जाना रे
कांटो को मां कलियाँ करती, विष को अमृत करती है 
अज्ञान अंधेरा मिट जाता  , ज्ञान की जोती जगती है 
जिसके सिर हो मां का साया, वो न कभी घबराता है 
मन दर्पण निर्मल हो जाता,  पाप से मुक्ति पाता है
देवो ने गाई अमृतवाणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

12 धामनगांव, मोहटा मे, मां का मंदिर प्यारा है 
सौदंति मे मां यल्लमा, काली रूप धारा है   
खंडवा बुरहानपुर  मे, मां की मूरत प्यारी है 
माहूरगढ़ मे ये जगदंबा, सबकी तारनहारी है 
छावल उत्तरकाशी, जो भी भक्त जाते है 
दर्शन करके माता को, मन चाहा वर पाते है
औरंगाबाद पातुर मे,मां की शान निराली है 
पठानकोट और चिखली मे, मां से होली दिवाली है
डोंगर में ये है इकवीरा, सबकी विपदा हरती है 
जलालाबाद  बिसनूर मे, मां सुख की बरखा करती है 
जानापांव चांदबड़  मे, जो जयकारे गाते है
भक्तों के सब दुर्गम काज, पल मे सुगम हो जाते है  
सारी दुनिया मां की दिवानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

गीतकार - कीर्ति पाहूजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी



हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी
सुनकर भक्तों छलक उठेंगे आंखों से पानी 

1----------

परशुराम से एक दिन बोले जमदग्नि मुनिवर 
मानोगे मेरी आज्ञा न होगा कोई प्रश्न उत्तर 
सुनकर न करना इंकार,  पिता का रखना मान 
होगा मेरा तिरस्कार ये बात तू रखना ध्यान 
खेलेगी किस्मत कैसा खेल,  न परशुराम ने जानी
हैं मां रेणुका ____________

2-----------

परशुराम बिन सोचें बोले, निभाऊंगा वचन 
पालन करके आज्ञा का,  होगा मन मेरा उपवन
मुनिवर बोले परशुराम, अपना शस्त्र उठाओ
अपनी तुम माता का शीश धड़ से अलग कर जाओ
पुत्र का हो गया हृदय घात, सुनकर पिता की वाणी 
है मां रेणुका ___________

3----------

यह सोचकर थर-थर कांपे, पुत्र परशुराम 
होगा कैसे काम अनर्थ, चरण है जिनके धाम
मन ही मन में बह रही, अश्रु की तेज धारा
इस विधि के विधान ने यह क्या लिख डाला 
वक्त के आगे हार गए,  बड़े बड़े महाज्ञानी 
है मां रेणुका ____________

4------------

जीवन बन गई एक पहेली, कैसे सुलझाऊं
मां के मैं प्राण बचाऊं,या दिया वचन निभाऊं
मुझको मां करना क्षमा,  हालात से मजबूर 
हो जाएगा घोर पाप क्या था मेरा कसूर
उठाया शस्त्र मां के प्रति,  पिता की आज्ञा मानी
हैं मां रेणुका परशुराम _____________

5--------------

परशुराम से मुनिवर बोले,  मैं हूँ अति प्रसन्न
क्षण भर भी देर न की, पूरा तुमने किया वचन 
पितृ भक्ति बड़ी महान्,  मांगो तुम वरदान 
सुनलो पिता करुण पुकार, दो मां को जीवनदान 
बस यही है विनती मेरी,  करदो मेहरबानी 
हैं मां रेणुका परशुराम ____________

6-------------

परशुराम मां रेणुका की,  दे ये सीख घटना 
विवाद मातृ पितृ का बिन जाने पक्षन तोलना
सोचें समझें न देना तुम कोई भी वचन 
बाद मे पछताओगे,  न लौटेगा वो क्षण 
गांठ बांध लो भक्तों ना करना कभी नादानी 
हैं मां रेणुका परशुराम-----------

गीतकार - कीर्ति पाहुजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

रविवार, 5 जनवरी 2020

चला फरसा श्री परशुराम का



ना डर है किसी भी अंजाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
है विष्णु के अवतारी
करे क्रोध भयंकर भारी
डंका बजता ( 3) है  इनके नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

1) जमदारा से गए कैलाश , परशुराम शिव के पास
शिव से विद्या शक्ति पाए , फिर वो जमादारा आये
परशुराम आश्रम आये , वो पिता से आदेश पाए
कांटो शीश अपनी माता का , ना टाला आदेश पिता का
नहि पूछे वो 2 कारण इस काम
चला फरसा श्री परशुराम का

2) अगले पल छाया सन्नाटा ,शीश अपनी माता का काँटा
    साबित परशुराम ने कर दी , अपनी सच्ची पितृ भक्ति
   बोले पिता है परशुराम , मांगो जो चाहे वरदान
    सच्ची मेरी पितृ भक्ति , दों भाई को श्राप मुक्ति
   दान माँ मैं 2 माँ के जीवनदान का
    चला फरसा श्री परशुराम का

3) रेणुका जमदग्नि के बीच , शक की दीवार डाली खीच
सहस्त्रअर्जुन ने शक करवाया , गुस्सा परशुराम को आया
नैनुका अपने पति की जान , परशुराम से मांगे दान
परशुराम दे जीवनदान , नैनुका के बेटे बेईमान
कर दी हत्या जमदग्नि की , कामधेनु ना देने का इंतकाम था
चला फरसा श्री परशुराम का

4) माँ रेणुका शोक मनाये , परशुराम को बतलाए
सहस्त्रअर्जुन के बेटे सारे , तेरे पिता के है हत्यारे
रेणुका माँ को दुःख अपार , छाती पिटी 21 बार
परशुराम भरे ललकार , माई मैं भी 21बार
हाँ मिटा दूंगा 2 वंश छत्रियो के नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

5) जमादारा महू निराला , इनका इतिहास मतवाला
यहां धरती के नीचे जाकर , चुप गए सहस्त्रअर्जुन आकर
कोई जतन काम ना आये , परशुराम से बच ना पाए
परशुराम ने पलटी धरती , हत्या उस राजा की कर दी
हाँ हुआ जश्न सर पे इंतकाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
गीतकार - जयंत सांखला ( देवास )

आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

ठंडी ठंडी रुत मनभावन मौसम प्यारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

     अंतरा पहला
चूड़ी कंगन पायल बिछिया, लाये कोई बिंदिया
कोई सुंदर हार लिए  है, कोई चढाये चुनरिया।
बिछा के पलकें भक्तों ने, तेरी राह निहारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

दूसरा अंतरा
अमुवा की डाली पे तुम्हारा, झूला बनाएंगे
वंदन करने को चंदन का, चौक सजाएंगे
यहां पे मैया देखो तो, क्या अजब नजारा है
आ जाना यहां रेणुका माता, ये जमदारा है

अंतरा तीसरा
तेरे दर्शन से जन्मों की, प्यास बुझाना है
छप्पन भोग का तुमको, मैया भोग चढ़ाना है
करें निरंजन दर्शन हम , सौभाग्य हमारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है


चौथा अंतरा
कुल देवी हैं रेणुका मां , और शान हमारी है
स्वर्ग सी लागे ये भूमि , मां की बलिहारी है
जहां पै बहती सिंधु की , पावन जल धारा है
आ जाना यहां रेणुका माता , ये जमदारा है

गीतकार - निरंजन सेन
स्थान  - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है


खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है
नहीं और है कोई मां रेणुका माता है

                      सेर (1)
रहती है धूम बड़ी भारी,माता की जय जय गाते हैं मंदिर को खूब सजाते हैं , भक्ति में हम खो जाते इक्कीस  अगस्त का इंतजार , हमएक साल से करते हैं
यह तिथि है मां के जन्मदिन की ,हम मां का जश्न मनाते
                    
                            अंतरा
१)मॉ दिखलाये जल्वा ,ये ऐसा मंदिर है ये शक्तिपीठ हमे ,लगे स्वर्ग सा सुंदर है
प्यारा है गांव धामन ,तीरथ बन जाता है
खुशियों से जहां .  .      .......... 

                        सेर-(2)
लेकर के धर्म का नाम कुछ लोग अधर्म जो करते  कलयुग के बगला भगत हैं ये अंजाम से भी नही डरते हैं
मानवता मर्यादा भूले और अहंकार में डूबे हैं
सबके दिल मे मॉ प्रेम जगा, तेरे दुखी भक्त ये कहते हैं

                  अऩ्तरा-2
ढोंगी बाबाओं से भक्तों को बचा ले मां
कुछ भक्त भी हैं ढोगी ,तु उनको सजा दे मॉ
तु अंतर्यामी है, तू जग कि ग्याता है
              खुशियो से जहॉ.......
             
                         सेर-3
हर वर्ष यहां पर ,पॉच दिनों घट की स्थापना होती है
औऱ पॉच दिनो तक भक्तो की ,बडी कड़ी साधना होती है
कल तक जो एक भिखारी था इस दर से बऩा उद्योगपति
वर उसको वैसा ही देती मां जिसकी जो भावना होती है

                  अंतरा :- 3
हर चैत के महीने में रहता है बड़ा मेला होती है भीड यहां भक्तों का मचा रेला
निरंजन जो आता है ,वह पुण्य कमाता है
         खुशियों से जहां......

अभिलेखागार के उद्यान से चली मैया सवारी बड़े शान से


अभिलेखागार के उद्यान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से-२
भक्तो का जत्था प्यारा
तेरा करते हुए जयकारा २
गुंजी गलियां -२  तेरे गुणगान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
   अभिलेखागार .............

१)हो गयी दुनिया ये दीवानी
तुमको पाकर अंबे रानी
होवे नगर-नगर अगवानी
  तेरी रेणुका भवानी
हो मैं भी नचदी-२  पिरा बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
        अभिलेखागार के .........

२)रेणुकाखापा , सीताढाना
  तेरी भक्ति का दीवाना
ले के पालकी तुम्हारी
आये तेरे अस्थाना
उदो-उदो २  पुकारे बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
                अभिलेखागार के...........

३) माता को मंदिर में लाके
  रोली चंदन तिलक लगाके
भक्ता झूम झूम के गा के
कहता है बेनाम सुना के
तुमको पूजू  २ भवानी दिलो जान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से                                         
             अभिलेखागार के ...........

सांचा द्वारा धामनगांव का


सॉचा दुवारा धामन गांव का
जग से न्यारा धामन गांव का -२
मै नंगे नंगे पग आऊंगी
मैया तेरे अंगना में नच-नच गाऊंगी

१) दुखियों के दुख हरने वाली
खाली  झोली भरने वाली
मन मेरा लागा मैया तेरे भजन में
मुझको लगा लो मैया अपनी शरण में
ऩित ज्योत जगाऊंगी%
मैया तेरे अंगना में........

२) भृगु वंश की जननी माता
  तुम हो सुख संपत्ति की दाता
  बांझन खिलाएं गोदी में ललनवा
  बाजे बधाई मैया तेरे अंगनवा
में बलि-बलि जाऊंगी % मैया तेरे अँगना...

३) मां की मूरत मन को भाती
  तेरी ज्योत जले दिन राती
सोलह सिंगार लाई ,लाई चुनरिया
  बेनाम दर्शन की प्यासी नजरिया
कब दर्शन पाऊंगी % मैया तेरे अंगना

आओ चले मां का जन्मदिन मनाए


दिन है खुशी का झूम झूम गाए
आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

१) 31तारीख का दिन आया सरकारी फरमान सुनाया
   रेणुका भवानी २  का डोला उठाएं
        आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

२)माघ महीना पावन बेला ,लागा धामन गांव में मेला           
  बैतूल नगरी से २ मां को ले आए 
   आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

३)गौ माता के रूप में आई भक्तों के हैं भाग जगाई  
जिसने भी मां के२ दर्शन है पाये
  आवो चलो मां का जन्मदिन मनाएं

४) माँ ने कन्या रूप दिखाकर
   हाथन दे गई पुड़िया पकाकर
   आज किसी भूखे को २  भोजन कराये
    आओ चले माँ का जन्मदिन मनाये

५)जन्मी है जग जननी माता जो है सुख संपत्ति की दाता
बेनाम महिमा वरनी न जाए
  आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं
दिन है खुशी का २,झुम झुम गाये
आओ चलो मां का जन्मदिन

आये मां के नवराते , रेणुका मां के द्वारे


आये माँ के नवराते , झूमते नचते गाते 
रेणुका माँ के द्वारे , आये हम हर्ष मनाते
मन का मयूरा कहा खो गया
तेरे दर आके जाने माँ क्या हो गया
    रेणुका माँ माँ माँ रेणुका माँ माँ माँ  रेणुका माँ रेणुका
(1)      सच गई धामनगाँव की गलियाँ   
     F    खिल गई नवराते मे कलियाँ     
M      उधो उधो कहके तेरी अलख है जगाई रे
          मईया तेरे भक्तो ने ज्योति है जगाई रे
M       हल्दी से तन को रंगा के
         कुमकुम का तिलक लगा के
         जतरा मे तेरी आके खो गया
         तेरे दर आके जाने क्या हो गया
                       रेणुका माँ $ $$
(2)  F    टोलीया देखो सजने लगी है
      M   कौडिया देखो बँटने लगी है
            मेड्या भगत लगाते जय जय कारे
            रेणुका भवानी माँ के आये है द्वारे
       लाये कपास के दाने , हे मईया तुम्हे चढ़ाने
       मनौती माँ को सुनाते खो गया
       तेरे दर आके जाने खो गया
              रेणुका माँ $ रेणुका
(3) M     बूटलिया देखो सजने लगी है
      F     सहनाईया देखो बजने लगी है
           भक्तो की टोली माँ के द्वारे जब आयेगी      MF     कारी कारी काया  उजयारी हो जायेगी
  M    आया बेनाम द्वारे  करते माँ के जयकारे
  F     दुनिया के      खो गया ।
        तेरे दर आके जाने क्या हो गया

धामनगांव में सजा है दरबार भगत आये दूर दूर से



धॉमनगॉव मे सजा है दरबार ,भगत आय़े दुर दुर से
होवे रेणुका माता की जय जयकार
भगत आय़े दुर दुर से
1. शिखर सतपुडा की भूमि पर, धॉमनगॉव पुराना।
वियावान जंगल मे भक्तो , मंदिर बना सुहाना।।
कैसे आई रेणुका मात , रखने भक्तो की पल भात
हो मॉ का किसने किया है सिंगार
      भगत आय़े दुर दुर से

२.सन्१८६५मे मॉ ने सोते भाग्य जगाई
बल्लू मरघडे के सपने मे मात रेणुका आई
बीजा सेमल के दरम्यान मेरा वही बना स्थान
हो पृथ्वी खोद के मुझे लेना निकार
   भगत आय़े दुर दुर से

३.भोर भई तो बल्लु भगत ने, सबको बात बताई
  बीजा सेमल वृछ के नीचे करने चले खुदाई
निकली मॉ की मुरत न्यारी जयजयकार करे नरनारी
हो माता रेणुका को रहे जल डार
    भगत आय़े दुर दुर से

४.दुर दुर से मॉ की महिमा सुनकर भगत है आते
मात रेणुका की चौखट पर ,अपनी विनय सुनाते
सुनती है उसकी अरदास ,जो करता मॉ पे विश्वास
हो भऱती निर्धन का भवानीभण्डार
    भगत आय़े दुर दुर से

५. कुछ स्वार्थी भक्तो के मन मे  देखो लालच आया
माता की मुरत के नीचे  खुब गडी है माया
इऩको लोक लाज ना आई चोरी चोरी करे खुदाई
मातारानी ने दिखाया चमत्कार
   भगत आय़े दुर दुर से

६.चोर खुदाई जहॉ करते थे ,बिछे मटर के दाने
देख प्रकोप भवानी मॉ का , चोर लगे घबराने
अैसा लगा हृदय आघात , रास्ता मिला ना पुरी रात
रेणुका मॉ ने कराया गिरफ्तार
 भगत आय़े दुर दुर से

७.लालच के अन्धो को मॉ ने , ऐसा रंग दिखाया
हुये अपंग अंग से पापी गई सम्पति माया
मॉ से जो करता है बैर उसकी नही जान की खैर
हो मॉ की माया का ना पाया कोई पार    
   भगत आय़े दुर दुर से

८. कुछ भक्तो ने निर्णय करके , नई एक मुरत लाई
संगमरमर की उस मुरत को मंदिर मे बैठाई
देखो बन ना सका संयोग महामारी का फैला रोग
हो गुनिया बैगा डॉक्टर गये सब हार   
   भगत आय़े दुर दुर से

९.फिर से पुरानी प्रतिमा मॉ की मंदिर मे बैठाई
महामारी के रोग से भक्तो  सबने मुक्ति पाई
लेते माता जी का नाम बल्लु भगत गये सुरधाम
हो लहु भगत बन गये मॉ के खिदमदगार
भगत आय़े दुर दुर से

१०.लहू भगत के बाद मे भक्तो  गंगा घर है आये
मेजर ,सखाराम के संग मे  मॉ की भक्ती पाये
१९सौ २४ का आगाज  अंग्रेजो का जब था राज
हो अफसर मैया जी के पहुचे दरबार -भगत आय़े दुर दुर से

११.देख चढोत्री धन माया को अफसर है चकराने
माता के मंदिर मे देखो कब्जा लगे जमाने
मुझको रह रह आता याद कई वर्षो तक चला विवाद
हो जीते सखाराम शासन गया हार
   भगत आय़े दुर दुर से

१२.सन् १९ सौ ८३ मे फिर से विपदा आई
गौली बाबा नाम का लोभी करने लगा खुदाई
कैसा समय लगा विप्रित कट गया धड से मॉ का शिस
हो गॉवगॉव मे मचा है हाहाकार
 भगत आय़े दुर दुर से

१३.भक्तो ने थाने मे जाकर मिलकर रपट लिखाई
मानकर मुंशी जी ने भक्तो इसकी करी सुनवाई
धर्म आस्था का कर ख्याल चलने लगी जॉच पडताल
हो पकडे गयेजो थे मॉ केगुनहगार
     भगत आय़े दुर दुर से

१४. दोनो आरोपी को भक्तो जेल पडा फिर जाना
मॉ का सर अभिलेखागार बैतूल किया है रवाना
भक्तो के मन मे सुजा बिना शिस के हो ना पुजा
हो मिल के करने लगे ,सोचविचार
   भगत आय़े दुर दुर से

१५.सिंदुर सिर बना मैय्या का कर दी प्राण प्रतिष्ठा
जीनने ये अपराध किया था उनकी हुई भिनिष्ठा
कुड कुड मरे जेल मे जाये इनकी व्यथा कही ना जाये
हो जाकर गिरे है नरक के द्वार 
भगत आय़े दुर दुर से

१६.फिर १९सौ ८३ मे मॉ ने लीला दीखाई
विश्वकर्मा जी के सपने मे कन्या रूप मे आई
मॉ ने अपनी कृपा बरसाई सारी बीती बात बताई
हो पापीयो ने किया कैसा अत्याचार 
भगत आय़े दुर दुर से

१७.फिर देवी मॉ कहने लगी तन सिर के बिन प्यासा
मुझको धॉमनगॉव भिजाकर पुरी कर दे आशा
निॆद खुली तब होश मे आये  विश्वकर्मा जी गये घबराये
हो मित्र सोनी जी से बोले है विचार 
भगत आय़े दुर दुर से

१८.गये अभिलेखागार मे दोनो खोल पोटली देखी
मॉ के सिर के हो गये दर्शन औऱ पत्रिका लेखी
मालवीय जी के जाकर पास सारा खोल दिया इतिहास
हो पुजा अर्चन ,वन्दन किय़े बारम्बार 
भगत आय़े दुर दुर से

१९. एक समिति गठित करी है सबसे हाथ मिलाके
उत्तमराव ,आनन्दराव को अपने साथ मिलाके
भक्तगणो को लेकर साथ सुपुर्दनामा लेकर हाथ
हो चले मैय्या जी की करते जयजयकार
भगत आय़े दुरदुर से

२०.मैय्या का सि लेकर के भक्त चले झुमते गाते
सरकारी अभिलेखागार से बन्धन मुक्त कराके
चले सब मॉता के स्थान देखो करते हुये गुणगान
हो चारो ओऱ गुजे मॉ की जयजयकार
भगत आय़े दुर दुर से

२१.धॉमनगॉव मे कई माह से गिरा नही था पानी
होने लगी जोर से बारिश आई जब माता भवानी
छाई चारो तरफ खुशहाली सुखे मे हो गयी हरियाली
हो मॉ ने अपना दिखाया चमत्कार
          भगत आय़े दुर दुर से

२२.३१तारीख ८वॉ महिना  सन् १९सौ बावन
   मात रेणुका की जत्रा का दिन आया अति पावन
ऱेणुका खापा ,सीताढाना धॉमनगॉव को हुये रवाना
हो भीड जुटने लगी मंदिर मे अपार
भगत आय़े दुर दुर से

२३.मॉ के प्यारे भक्तो ने मॉ से कभी ना नाता तोडा
दुजा धड बनाके फिर से मॉ के शिस को जोडा
सबपे करती है करूणाई तीन रूप मे बैठी माई
हो सबका भरती है मॉ खाली भण्डार
  भगत आय़े दुर दुर से

२४. चैत्र मास की पावन बेला मिलकर खुशियॉ मनाते
   परदेशी बेनाम सदा मॉ तेरी महिमा गाते
सब भक्तो से तेरा नाता ब्राह्मण कुल की हो जननी माता
हो सबकी सुनती हो करूण पुकार
भगत आय़े दुर दुर से

हें मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी


मां रेणुका देवी की गाथा
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी -२
ब्राह्मण कुल की जननी माता -२
भक्तन की हितकारी %
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी
हे प्यारे भक्तों आज हम आपको माता रेणुका की पावन गाथा सुनाने का प्रयास कर रहे  हैं इस गाथा को श्रीमान रविन्द्र मानकर जी ने धामनगाँव रेणुका माता की प्रेरणा और आशीर्वाद से कई पुराणों से गुथकर एक माला में पिरोया है और गोविंद बेनाम ने जिसे शब्दों की डोर से बांधा है मां रेणुका के चरणों में यह माला समर्पित है आशा करते हैं आप सबको पसंद आएगी ।
             बोलो रेणुका माता की जय
1.कन्नौज राज में गधी नाम के राजा करते थे शासन
सत्य धर्म के थे प्रतिपालक दुखियों के दुख करते हरण
सत्यवती थी जिनकी कन्या रूप,रंग, गुण खान वली
भृगुवंशी ऋचिक राजा,कर विवाह वह संग चली
बाबुल का घर अंगना छूटा -२,छुटी सखियॉ सारी
                  हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

महाराज ऋचिक सत्यवती को विवाह कर अपनी चरण कुटी पर ले आते हैं और अपने गृहस्थ जीवन में प्रवेश करते हैं सत्यवती की सेवा भाव से महाराज ऋचिक अति प्रसन्न होते हैं और उनसे वरदान मांगने को कहते हैं

2. सत्यवती फिर कहने लगी आपको हो घट घट के वासी
उदय हुए प्रभु भाग्य हमारे आई बनकर के दासी
मेरी मॉ को पुत्र हुये ना, गोदी मां की है खाली
पुत्रवती का वर दे करके स्वामी कर दो खुशहाली
सुनकर के प्रार्थना सत्यवती की-२ कहने लगे तपधारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

महाराज ऋचिक ने सत्यवती की प्रार्थना सुनकर उन्हें फल स्वरुप दो चरू प्रदान किये। एक उनके लिए और एक उनकी माता के लिए,सत्यवती की माता के मन में अति तेजवान पुत्र की लालसा थी इसलिए उन्होंने अपनी बेटी वाला चरू खा लिया औऱ अपना वाला चरू उसे दे दिया

3. खाकर करके प्रसाद हरि का मन आनंद रहा छाये
  कुछ ही समय पर मां बेटी ने सुंदर दो ललना जाय़े
जिसके भाग्य में जो लिखा है उसको वो मिल जाता है
सूखे सरोवर में भी भक्तों कमल पुष्प खिल जाता है
हरि की लीला हरि ही जाने क्या जाने संसारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

हे प्यारे भक्तो सत्यवती की मां के गर्भ से ब्राह्मण तेज वाले बालक ने जन्म लिया जो आगे चलकर विश्वामित्र के नाम से विख्यात हुये।

4.ऋचिकराज और सत्यवती के अंगना फूली फुलवारी
जमदग्नि रूप में आए ब्राह्मण भूषण तपधारी
सप्तर्षियों में जिनकी गणना आगे चलकर के आई
वेद पाठ और यज्ञ हवन कर तरुण अवस्था को पाई
दूर-दूर तक जिनकी महिमा-२ गाए नर और नारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

ऋचिक महाराज सत्यवति से कहते हैं हे प्रिय आपने अपनी माता का चरू ग्रहण किया है इसलिए उनमें क्षत्रिय वाला तेज रहेगा और क्रोधी स्वभाव हमेशा रहेगा और संतान के रूप में स्वयं भगवान विष्णु अवतार लेंगे
5. प्रसेनजित राजा के घर में महाशक्ति ने जन्म लिया

  रेणुका नाम रखा कन्या का हरिभक्ति ने जन्म लिया
  कऱती तपस्या बालापन से युवा अवस्था को पाई
  जमदग्नि की पत्नी बनकर भृगुकुल में हैं आई
पति सेवा और प्रेम नेम से-२ डोर प्रीत की डारी
    हे मात रेणुका गाये हम महिमा

जमदग्नि और रेणुका माता हिमालय से भ्रमण करते हुए हरियाणा पहुंचे कुछ समय वहां बिताया , माता रेणुका पति सेवा में दिन रात लगी रहती थी ।

6. पॉच पुत्र की बन गई माता जग से नाता जोड़ लिया
जिनके प्रेम में श्री विष्णु ने नींज वैकुंठ को छोड़  दिया
जमदग्नि के घर आंगन में झूल रहे हरिहर झुलना
द्वितीय राम बनकर के आय़े रेणुका माता के ललना
भृगुवंश में बजी बधाई-२ आए गर्भ …………..
       हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

माता रेणुका की पॉच संताने उत्पन्न हुई इनमें से सबसे छोटे विष्णु के अवतार परशुराम कहलाते हैं अपने दादा रिचिक और पिता जमदग्नि से इन्होंने वेदपाठ और अस्त्र शस्त्र विद्या का अध्ययन किया और भगवान शंकर को अपना गुरु बना कर वरदानों की प्राप्ति की ।

7. तज हरियाणा की भूमि को मध्यप्रदेश में आन रमें
जानापाव में बना आश्रम अपना बिताने लगे समय
दिन प्रति दिन क्षत्रिय राजाओं का बढ़ने लागा अत्याचार
इसलिए तो रेणुका नंदन बनके हरि ने लिया अवतार
शिव के साधना के है साधक ब्राह्मण कुल अवतारी
   हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

महर्षि जमदग्नि अपनी पत्नी और पांच पुत्रों के साथ जानापाव ग्राम में अपना आश्रम बनाकर भगवान का भजन करते हुए अपना समय बिताने लगे और माता रेणुका अपने पांच पुत्रों का पालन पोषण करते हुए पतिव्रत धर्म का पालन करती चली गई

8. माता रेणुका थी प्रतिव्रता सदा पति का ध्यान करें
कामधेनु थी जिनके गृह में  मनचाहा नित दान करे
एक दिन रिसीवर कहे पत्नी से जाओ जल लेकर आओ
भोग लगाने इष्टदेव को ताजे फल लेकर आओ
चली रेणुका जल लेने को -२ विधि गति टरे न टारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

जब माता रेणुका जल  लेकर के वापस आ रही थी तो उनकी दृष्टि सरिता के किनारे जलक्रीडा करते हुए चित्ररथ गंधर्व पर पड़ी जो अप्सराओं के साथ काम को उत्तेजी कर रहा था जिसे देखकर मॉ रेणुका ध्यान मग्न हो गई

9. देख दशा गंधर्व रति का ,तन की सुधबुध है  छुटी
रेणुका मां की सर की गगरिया सुनो अचानक है फूटी
जिसका पाप लगा माता को ऋषिवर मॉ से रूठ गए
जन्म-जन्म के रिश्ते नाते आज अचानक टूट गए
क्रोध रूप में बोले रिसीवर-२ मार मार किलकारी
      हे मात रेणुका गाय हम महिमा

तुम्हारी महर्षि जमदग्नि ने मा रेणुका को आश्रम के बाहर ही रोक दिया और अपने पुत्रों से कहने लगे तुम्हारी माता कुलघातनी है इसका इसी समय वध कर दो यह सुनकर चारों पुत्र रोने लगे और पिता से छमा याचना करने लगे औऱ क्या  कहने लगे

10 .ये है हमारी जननी माता इनसे प्यार दुलार मिले
जिसका दूध पिया है हमने उस पर ना तलवार चले
जमदग्नि ने जल लेकर के चारों पुत्रों पर मारा
मूर्छित पड़े धरन पर लेटे प्रबल क्रोध की है धारा
खड़ी रेणुका रोय़े सिसककर-२ बेटो की महतारी
      हे मात रेणुका गाये हम महिमा तुम्हारी

माता रेणुका किलप किलप कर रो रही है हाय मेरे लालो को मैने इसी दिन के लिये पाला था,  हे प्राणनाथ आप हमारे प्राण ले लीजे ,पर मेरे पुत्रो को जीवनदान दे दीजे स्वामी , हे भगवान , हे ईश्वर , मेरे पुत्रो की रछा करे ।

11. परशुराम जब आए गृह को, देख दशा बेहाल हुये
    जमदग्नि है बड़े क्रोध मे, जिनके नैना लाल हुये
   चारों भाई पडे पृथ्वी पर, माता रेणुका रोए रही
दिल की हिचकी थमे न थामे, असुवन से मुख धोए रही
हाथ जोडकर कहे पिता से-२ परशुराम प्रण धारी
   हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

परशुराम जी अपने पिता से पूछते हैं -हे पिताश्री मेरे भाइयों ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया  जो आज उनकी यह दशा हुई परशुराम की बात सुनकर जमदग्नि कहने लगे हे पुत्र उन्होंने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया इनकी माता दुराचारिणी है अकेले मे गन्धर्वो के साथ इसका मेलजोल है इसलिए मैंने उनसे कहा कि अपनी माता का सिर काट दे पर इन्होंने मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया और इस मरण अवस्था को पहुंच गए अगर तुमने भी मेरी आज्ञा का पालन नहीं किया तो तुम्हारा भी यही हाल होगा

12. मान पिता की आज्ञा सुत ने , अपना झुका ललाट दिया
जिसने जन्म दिया उस मॉ  का ,एक पल में सिर काट दिया
ठंडी छाती हुई पिता की , होठों पर आई मुस्कान
परशुराम से कहने लागे, बेटा माँग लेव वरदान
पितु भक्ति तेरी देखके लालन -२ हुई प्रसन्नता भारी
    हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

पिताश्री के वचन सुनकर परशुराम जी कहते हैं - हे पिता श्री आप हमें कितने वरदान दे सकते हैं जमदग्नि खुशी के मारे कहने लगे -बेटा, तुम्हें जितने वरदान मांगना है उतने मांग लो, मैं तुम से अति प्रसन्न हूं , परशुराम क्या कहने लगे:-

13.  हाथ जोड़कर कहे पिता से ,माता को जिंदा कर दे
करके कृपा अपने  लालन पर , मुझको यह पहला वर दे
मेरे चारों भाई पड़े हैं , इनकी मुर्छा दुर करे
क्रोध छोड़कर सुनिए पिताजी ,हम सब के दुख दर्द हरे
परशुराम की यही है विनती -२ हरिये विपत हमारी
    हे मात रेणुका गाए हम गाथा तुम्हारी

महर्षि जमदग्नि मृत्यु संजीवनी मंत्र के जानकार थे उन्होने परशुराम के वचन मानकर माता रेणुका को फिर से जीवनदान दिया और उनके चारों पुत्रो को मूर्छा से मुक्त कर दिया यह देख कर सारे ऋषि , मुनि गण  उनकी जय जयकार करने लगे
               बोलो भृगुनंदन महर्षि जमदग्नि की जय
               बोलो रेणुका नंदन परशुराम महाराज की जय

14.परशुराम जी कहे माता से, माता भाग्य जगा दीजे
क्यो गंधर्वो से मिलने गई थी ,सारा हाल बता दीजे
भृगुवंश की परंपरा का,  दूर-दूर तक लेख मिले
पतिव्रता और सती नारी का , सत्य जमाना देख भी ले
अपने पुत्र की सुन मृदु वाणी  -२ खुश हो गयी महतारी
   हे मात रेणुका गाये  हम गाथा तुम्हारी

माता रेणुका परशुराम से कहने लगी हे-हे राम मेरे पिता इच्छ्वाकु वंश के राजा थे हमारे राज्य की तलहटी में गंधर्वो  का राज्य था गंधर्व अति सुंदर होते हैं किंतु तलहटी के पानी में एक विशेषता है कि उम्र ढलते ढलते ही इन लोगों में कुष्ठ रोग पनपने लगता है मेरा वंश सुर्य  उपासक था,  भगवान भास्कर की कृपा से कुष्ठरोग की औषधि मेरे पिता जानते थे उन के बाद यह ज्ञान मुझे प्राप्त हुआ।

15. कुष्ठरोग था गंन्धर्वो को , दशा देख मैं घबराई
उनका दुख हरने की खातिर , मिलने का वर दे आई
रोगी का मै रोग मिटाने, मन में अपने रहम गई
मगर तुम्हारे पिता श्री का ,क्रोध देख मैं सहम गई
इसके बाद  हुआ क्या बेटा-२,  बिसरी बातें सारी
हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

माता रेणुका की बातें सुनकर महर्षि जमदग्नि अपने किए पर बहुत पछताते हैं औऱ अपनी  पत्नी से कहते हैं -मुझे क्षमा करें -देवी मै आपके भाव को नही समझ सका और आपके ऊपर  क्रोध कर बैठा ।
16. मात रेणुका की यह गाथा, जो भी भक्ता ध्यान करें
कुष्ठ रोग और चर्म रोग से मॉ उनका कल्याण करें
भृगुवंश की  धर्म पताका , देश देश में लहराई
ब्राह्मण कुल की जननी माता ,मात रेणुका कहलाई
परदेसी बेनाम सदा मॉ-२, तेरे चरणों में बलहारी
     हे मात रेणुका गाये हम गाथा तुम्हारी

रेणुका मैया के धाम है निराले

रेणुका मैया के है धाम निराली
जगदम्बा मैया आए तेरे द्वार
जगदम्बा मैया आए तेरे धाम
तुम्हारे दर्शन कों आई लललाई
जगदम्बा मैया आये तेरे द्वार

1) माह महीना मैया तुम्हरे द्वारे मेला लागो
 आन विराजि बैतूल नगर में माई कों डंका बाजे
 धामनगांव भयो अलबेला जन बच्चन सब आए
 तेरे चरणो की दास है बेचारे
  जगदम्बा मैया आए तेरे द्वार रेणुका मैया


2) जमदग्नि की पत्नी ब्याहता परशुराम माहतारी
 अंग गिरे थें जहाँ माई के सिद्धपीठ दर्शानी
 सतपुड़ा पर्वत ताप्ती अंचल में है माई विराजी
 जिन के भवनों की शान है लुभाई
 जगदम्बा मैया आए तेरे धाम

3) कितनी प्यारी बनी मडुदिया शोभावर्णी ना जाये
 निहुर निहुर के पैंया लागे प्रदीप तुम्हारे जस गाए
 काला काजल और डीठोना तुम्हारी नजरिया उतारे
 तुम्हे सुमरू मैं साज सकारे जगदम्बा आए तेरे द्वार

गीत रचना - प्रदीप पटेल जबलपुर
गायक - प्रदीप पटेल जी
निर्माता - रविन्द्र मानकर
एडीटर - सुभाष चरपे बैतूल
एलबम - श्री रेणुका महिमा

वीडियो लिंक से रेणुका भजन सूने
https://youtu.be/hleG4W2-VOU