शनिवार, 11 जुलाई 2020

सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

🌺🌺🙏🙏🙏*।। देवी जस ।।*🙏🙏🙏🌺🌺

सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
 तेरी जय जयकार भवानी, तेरी जय जयकार माँ - k
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
जगदम्बा मैय्या घट घट बसो रे ... 
घट घट बसो रे मैय्या पूजे सकल संसार रे ...
जगदम्बा मैया हो..
======= मुखड़ा ========

विंध्यवासिनी जब हुई राज़ी ।।
मेहंदी गाँव में आन बिराजी ।।
हारी जीत गये सब बाज़ी ... तेरी जय जयकार माँ 
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

विन्ध्याचल में है ज्योती तुम्हारी ...
ज्योती तुम्हारी मेहंदी गाँव हुआ उजियार रे ...
 विंध्याचल मैया हो...
===== पहला अंतरा ======

चोला बदल बदलकर आये ।।
बाल युवा वृद्धा बन जाये ।।
आँखों वाला चक्कर खाये ... तेरी जय जयकार माँ ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

कोराड़ी वाली अम्बा जगदम्बा ...
अम्बा जगदम्बा मैय्या करती अजब सिंगारे रे ...
जगदम्बा मैया हो....
===== दूसरा अंतरा ======

चार दिवारी से है घेरा ।।
बीच किले में डाली डेरा ।।
अटल भवानी राज है तेरा ... तेरी जय जयकार माँ ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ

नगरधन में है आसन तुम्हारो ...
आसन तुम्हारो मैय्या धारे जगत का भार रे ...
भवानी मैया हो.....
====== तीसरा अंतरा =====

तेजराम पर दया करी माँ ।।
पाया शिवगौरी की प्रतिमा ।।
गढ़ पर्वत पर गूँजी महिमा ... तेरी जय जयकार माँ  ...
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जय कार माँ

पटगोवारी है माँ की  नगरिया...
माँ की नगरिया गौरा शिव संग करत संसार रे ...
शिवगौरी मैया हो...
====== चौथा अंतरा ======

जो ये चार धाम हो आये ।।
निश्चित चारों फल पा जाये ।।
दुर्गाप्रसाद सदा गुण गाये ... तेरी जय जयकार माँ ..
2k_सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ 

अशरण को तुम्हीं देतीं शरण माँ ...
 देतीं शरण माँ मैं भी आया हूँ तेरे दरबार रे ...
विन्ध्याचल मैया हो.....
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ - k
सात द्वीप नौ खण्ड मे हो रही ... तेरी जय जयकार माँ 3k
===== पाँचवाँ अंतरा =====

लेखक : संदीप करोसिया
           *श्यामसरोज*
निर्माता, निर्देशक :दुर्गाप्रसाद धनोले
            📲-7709506291

भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव

रुणुक झुणूक माँ विंध्यवासिनी, आगई मेहँदी गावं
भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव - 2

विन्ध्याचल की विंध्यवासिनी, मेहँदी गावं की शान हो
भक्तों को दर्शन देकर माँ, करती जग कल्याण हो
पर्वतराज का मान बढ़ाकर - 2 आई मेहँदी गावं
भक्तों को तारण बैठी माँ, नीम की थंडी छाव - 2

हुआ अवतार योग मात का, विंध्य गिरी मे छाई
पूजित हुई संसार में माता, अष्‍टभुजा कहलाई
एक दिवाने भक्त की खातिर - 2 पहुची मेहँदी गावं
भक्तों को तारण बैठी माँ, नीम की थंडी छाव-2

पावन हो गई गाव की धरती, जबसे चरण पडे माँ
दुर्गा दुर्गती दूर करो माँ, दुर्गा दास कहे माँ
कर स्विकार माँ आरती - 2 और दे आचल की छाव
भक्तों को तारण बैठीं माँ, नीम की थंडी छाव-2

रुणुक झुणूक माँ विंध्यवासिनी, आगई मेहँदी गावं
भक्तों को तारन बैठीं माँ,नीम की थंडी छाव - 2

गीतकार : रवि शंकर सोनी
निर्देशक  :दुर्गाप्रसाद धनोले 📲-7709506291
विशेष सहयोग - धर्म प्रचार प्रसार मंच 

विंध्यवासिनी मन्दिर मेहन्दी गाथा - भजन गायिका चांदनी शर्मा

मेहँदी गाव मे सजा है दरबार, भगत आये दूर दूर से-2
हो बैठी विंध्यवासिनी मैया आसन मार, भगत आये दूर दूर से

1_पेंच नदी किनारे बसा ये, मेहंदी गाव निराला
भक्तों को मन मोहक लगे, मैया तेरा दिवाला
झंडा लहर लहर लहराया , किसने मंदिर तेरा बनाया
हो किया हम भक्तों पे बड़ा उपकार, भगत आये दूर दूर से....

2_ग्रामवासियों ने मिलकर के, मंदिर भव्य बनाया
शाकम्भरी नवरात्री शुभ दिन, तोरण द्वार सजाया
माँ का करके अर्चन वंदन, शिव के प्राथ्रीक लिंग का पूजन
हो सतचंडी यज्ञ किया है अपार, भगत आये दूर दूर से......

3_शोभा यात्रा निकली माँ की, भक्तन भीड़ है भारी
घट स्थापन कर भक्तों ने, बोले जय जय कारी
पूजे सात दीप नौ खंड, ज्योति प्रज्वलित माँ की अखंड
हो किया मैया जी का भक्तों ने शृंगार, भगत आये दूर दूर से...

4_दूज तीज और चौथ पंचमी, भक्तन ने जल ढारे
छटे सप्तमी तिथि अष्टमी,  माँ के निकले जवारे
हवन पूजन कर आरती वंदन, सबको तिलक लगाके चंदन
हो कन्या भोजन का लगाया भंडार, भगत आये दूर दूर से...

5_नवमी तिथि विसर्जन बेला, माँ के निकले जवारे
कासी टेकडी पेंच नदी के, पोहचे घाट किनारे
माँ का लेकर आशीर्वाद, भक्तों पाओ महाप्रसाद
हो कल कल कर ती जाये पेंच नदी की धार, भगत आये दूर दूर से...

6_शाकम्भरी नवरात्री तबसे, भक्त यहा है मनाते
विंध्यवासिनी माँ के दर से, मनकी मनोती पाते
करलो भजन कीर्तन गान, जीवन का करने कल्याण
हो बाजे ढोल नगाड़े मैया जी के द्वार, भगत आये दूर दूर से

7_मेहंदी गाव की गाथा लिखकर, मन मेरा हरसाया
दुर्गाप्रसाद धनोले जी ने, सारा हाल सुनाया
विनती करता है बेनाम, बुलवा ले माँ अपने धाम
हों मनकी मनसा माँ करले स्विकार,भगत आये दूर दूर से


गुरुवार, 9 जुलाई 2020

माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है - भजन गायक रवि सोनी

मुझे मेरे मुस्किल का - 2, हल मिल गया है ! 
माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है !

मिटणे लगी है चिंता मन की. ढाल बनी माँ घर आंगण की !
भक्तों को भक्ति का - 2, फल मिल गया है !

कोण है खुश किस आँख मे पानी, माँ तो जाने सबकी कहानी!
मैया के चरणों का - 2, घर मिल गया है!

माँ को पास मे ले आयेंगी, प्रार्थना खाली ना जाएंगी ! 
भक्ती के गीत को - 2, असर मिल गया है! 

दुःख मे साथी चंद मिलते है , हर दरवाज़े बंद मिलते है!
हरपल खुला माँ का - 2, दर मिल गया है!

मुस्किल कुछ नहीं तेरे लिये माँ, तू ही सब कुछ मेरे लिये! 
जिंदगी के नाव को - 2, सफर मिल गया है! 

दुर्गाप्रसाद को देता सहारा, स्वर्ग से साचा द्वार तुम्हारा ! 
जयंत को आने वाला - 2, कल मिल गया है!

सोमवार, 27 जनवरी 2020

माँ रेणुका देवी अमृतवाणी

भक्तों तुमने तो अनेक पावन कथा होगी । भोले भंडारी की,  कलकत्ते वाली की,  राधे श्याम की,  सिया राम की । पर जो आज पावन कथा मै तुमको सुनाने जा रहा हूँ वह सबसे भिन्न है, अनुपम है। मां दुर्गा की  अवतारी, मां रेणुका के, अवतरण की कथा बड़ी मनोरम है। तो आओं प्रिय भक्तों मां रेणुका का गुणगान करे।सच्चे मन से उनका ध्यान धरे।

*************************************

नमो नमः ×4, 
नमो नमः मां रेणुका × 4
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
पावन तेरी अमृतवाणी,  सबके मां संकट हरो
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

1-------------

जगदंबा की तू अवतारी,  तेरी महिमा न्यारी है 
आदि शक्ति सिद्ध स्वरूपा,  पूजे सृष्टि सारी है
सूरज में मां तेज तुम्हारा,  चंद्र में शीतल छाया है 
कण-कण में मां तेरा जलवा, तेरा रूप ही पाया है 
वृक्ष लता सब पौधे मां,  तुझसे फ़ले फूले है
धरती अम्बर और तारे, तुम बिन मां अधूरे है 
जगमग तेरी जोत नूरानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका × 4
**************************************

मां रेणुका का पूर्व जन्म में अदिति था। अदिति शिव जी की उपासक थी । उन्होंने कई वर्षों तक शिव जी की आराधना तपस्या की। अदिति के जप-तप से प्रसन्न होकर शिव जी उन्हें कई वरदान दिए।

****************************************

2---------------

पूर्व जनम मे रेणुका ने, नाम अदिति पाया था।
कईं वर्षों तक कर तपस्या शिव भोले को मनाया था ।
राई को पर्वत कर देती,  तू मां बड़ी निराली है।
गागर में सागर भर देती,  तेरी कीर्ति न्यारी है ।
अपनी ममता का खजाना,  भक्तों पे लुटाती हो ।
जो भी तुझको शीश झुकाता, उसकी बिगड़ी बनाती हो ।
सब पर है तेरी मेहरबानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

माँ रेणुका ने पूर्व जन्म  अदिति रूप में कई वरदान प्राप्त किए। पहला वरदान उनको यह मिला कि प्रभु हरि का छठवां अवतार तुम्हारी कोख से जन्म होगा ।
जग मे तुम्हारी अत्यधिक  मान- प्रतिष्ठा  होगी।  तुम्हे इकवीरा के नाम से भी जाना जाएगा ।

3------------

शिव से वर माँ तुमने पाया , जग में मान पाओगी 
प्रभू हरी ले कोख से जन्म , इकवीरा कहलाओगी 
दुखियों के तू कष्ट निवारे , तू माँ सुखदाई है 
भवसिंधु से पार उतारे , सबकी तू सहाई है 
जीवन में हो जितनी उलझन , उसको तुम सुलझाती हो 
जो माँ तेरा ध्यान धरे , संकट से उसे बचाती हो 
तेरी शक्ति सबने मानी , मां रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4
***************************************

मां रेणुका का जन्म इक्ष्वाकु वंशीय राजा रेणु के महल में हुआ । राजा रेणु की दो पुत्रीया थी ,  रेणुका और बेणुका। दोनो पुत्री रूपमती थी। राजा को अपनी धन दौलत का अहंकार था। एक दिन राजा ने अपनी पुत्रियों से प्रश्न किया कि तुम किसका दिया खाती हो। बेणुका के उत्तर से राजा रेणु अत्यधिक प्रसन्न हुए क्योंकि बेणुका ने कहा पिताजी मैं आपका दिया खाती हूँ । पर रेणुका का उत्तर सुनकर अत्यधिक क्रोधित हुए क्योंकि रेणुका ने कहा पिताजी मैं परमात्मा का दिया हुआ अपने नसीब का खाती हूँ ।प्रतिकार स्वरूप राजा ने बेणुका का विवाह पराक्रमी राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन से किया और रेणुका का विवाह निर्धन तपस्वी भृगुवंशीय मुनि जमदग्नि से किया ।

4-----------------

राजा रेणु की तू पुत्री,  जमदग्नि तेरे स्वामी है 
घट घट में मां तू समाई, तू मां अन्तर्यामी है
तू चाहे तो बंजर मे, हरियाली लहराती है 
सूखे सरवर मे भी मां,  तू ही फूल खिलाती है
पत्थर को पारस कर देती,  तेरी शक्ति अपार है
जो मां तेरी माला जपता, उसका मां उद्धार है
जग कहता तुमको कल्याणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

अदिति को शिव जी से  दूसरा वरदान यह मिला कि कलयुग में तुम्हे महादेवी के रूप मे पहचाना जाएगा ।
कुल देवी के रूप मे तुम्हारी पूजा की जाएगी । तुम्हे कुल स्वामी भी कहा जाएगा ।तुम्हारी आराधना करने से विधवा भी सुहागन हो जाएगी। तुम सदा नारी की लाज बजाओगी। तुम सबकी मनोकामना पूर्ण करोगी।

5------------

कलयुग में देवी की देवी , मैया तुम कहाती हो 
कुलदेवी के रूप में माँ , तुम तो पूजी जाती हो 
सतियों के तु सत संवारे , सबकी लाज बचाती  है 
विधवा को तु मंगली करती ,आस का दीप जगाती है
मंगल करती सारे काज , अमंगल तुम हरती हो 
जो माँ करता तेरा पाठ , कामना पूरी करती हो 
जग में ना तुमसा वरदानी,मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

******************************************

मां रेणुका को पांच पुत्रो की प्राप्ति हुई । शिव जी के वरदान अनुसार पांचवे पुत्र परशुराम जो प्रभु हरि के छठवे अवतार के रूप मे जाने जाते है। उनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हुआ था। जिस तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है ।परशुराम तेजस्वी  पराक्रमी थे।

6------------------

परशुराम की तू है माता , सबकी तू हितकारी है
लाचारो को देती सहारा , भक्तों को रखवाली है 
सुखे नीरज जीवन में माँ , तुम ही बहार लाती हो
गम के बादल दूर भगाती , खुशियाँ तुम बरसाती हो
करुणा की माँ निर्मल धारा , तेरे चरणो बहती है 
करता जो माँ तेरा चिंतन , उसे न चिंता रहती है
तुमको सेवत ब्रम्हाज्ञानी  ..माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

मां रेणुका को अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है । अन्नपूर्णा माता का हृदय सागर से भी विशाल है । अन्नपूर्णा माता की कृपा से सबके भंडार भरे रहते हैं । माता की दया दृष्टि जिस पर हो वो कभी भूखा नही सो सकता । माता पल भर मे ही निर्धन को धनवान बना देती है । अन्नपूर्णा मां के चरणो मे मेरा कोटि कोटि प्रणाम ।

(बोलो रेणुका माता की जय)

7------------------------

अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा , जग का पालन करती हो
अन्न धन के सबके माता , तुम भण्डार भरती हो
भुक्षुक को सम्राट बना दे , तेरी अजब ये माया है
निर्बल को दे अपना बल , प्रेम सुधा बरसाया है 
तेरा जो अर्चन करता, वो सुख समृद्धि पाता है 
आनन्द वैभव देने वाली , कर्ज से मुक्त हो जाता है 
तु हि माँ सम्पति की दानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

*****************************************
रेणुका झील की गाथा बड़ी पावन है। प्रबोधिनी एकादशी की पूर्व संध्या पर यहाँ मेला भराता है। कहां जाता  हैं कि भगवान परशुराम अपनी मां रेणुका से आशीर्वाद लेने यहाँ आते हैं। माता और पुत्र को समर्पित यह मेला पूरे विश्व में अनूठा कहा जाता है। यहां रेणुका झील के किनारे भगवान परशुराम एवं मां रेणुका का मंदिर भी स्थित है। 


8---------------------

हिमाचल में झील रेणुका, जिसकी पावन गाथा है 
दोष रोग से मुक्त हो जाता, जो भी डुबकी लगाता है
तेरे माता इशारे से , कंकर मोती बनते है 
रेगिस्तान में भी माँ , उपवन ख़ूब महकते है 
सुख का होता नया सवेरा , दुःख की शाम ढलती है 
श्रध्दा सुमन जो अर्पण करता , उसकी झोली भरती  है
देरी गाथा वेद बखानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

************************************

मां रेणुका के देश भर मे कई शक्ति पीठ है। मां का रूप अति सुन्दर है। मां रेणुका के दर्शन मात्र से ही मन प्रफुल्लित हो जाता है,  सुख शांति का आभास होता है ,जीवन संवर जाता है । तीनों लोक मे माता का गुणगान होता है। मां की पावन जोत से तीनो लोको मे उजाला फैला हुआ है। जो भक्त माता का पूजन अर्चन करता है। वो भव सागर से तर जाता है ।

9------------------------

चन्द्र सा तेरा रूप चमके,  मुख माँ बड़ा विशाल है 
नयन है तेरे मोटे लाल , बोंहें माँ विकराल है 
तेरा दर्शन जो भी करता, भव से वो तर जाता है 
लाख चौरासी योनियों से , वो माँ मोक्ष पाता है 
विकट डगर में माँ रेणुका , जिसने तुम्हे पुकारा  है
जीवन के पग पग में माँ ,  तूने उसे संभाला है
सिमरन करते सारे प्राणी, माँ रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4 

परशुराम ने विवश होकर अपने पिता की आज्ञा का पालन किया ।उन्होंने अपनी माँ रेणुका का शीश धड़ से अलग कर दिया । परशुराम के पिता जमदग्नि मुनिवर पुत्र की आज्ञा के पालन अति प्रसन्न हुए । जमदग्नि मुनिवर ने फ  स्वरूप उनको वरदान मांगने को कहा  तो परशुराम वरदान स्वरूप कुछ भी मांग सकते थे। पर माँ तो माँ होती है और माँ का स्थान इस जग मे कोई दूजा नही पा सकता। इसलिए परशुराम ने वरदान मे अपनी माँ रेणुका का पुनर्जीवन मांगा। जमदग्नि मुनिवर ने परशुराम की इच्छा पूर्ण की और माँ रेणुका को पुनर्जीवन दिया । जमदारा की दैविक भूमि पर यह घटना घटित हुई । माँ रेणुका के बहते रक्त ने पाषण का रूप धर लिया । और आज यहाँ  माँ रेणुका की भव्य मंदिर सजा हुआ है। दूर-दूर से भक्त श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं । और इच्छा फल प्राप्त करते हैं 


10------------------

होकर परशुराम विवश, अपना वचन निभाते हैं 
अपनी माँ का शीश धड़ से , खुद ही अलग कर जाते है
माता के बहते रक्त ने,  वहां पत्थर रूप धारा है 
धन्य हो गई वो धरती,  जहाँ मां का मंदिर प्यारा है 
माटी को चंदन कर देती,  लोहा कंचन करती हैं 
करता जो  ही मां का किरतन, किस्मत उसकी बदलती है 
तेरी लीला सबने जानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

*****************************************

मां रेणुका का हृदय कोमल है। वह अपने भक्तों पर, बच्चों पर अपार ममता लुटाती है। जो इनकी शरण मे आ जाता है उसे हर संकट से बचाती है। हे प्राणी मोहमाया से छूटकर मां की लगन लगाले। अपने जीवन की डोर मां को सौंप दे।  तेरे जीवन कश्ती की पतवार है मां । वो तुझे कभी बींच भंवर मे न डोलने देगी। अपना संपूर्ण जीवन मां की सेवा मे लगाले।

11--------------------

इधर उधर क्यूँ भटकें प्राणी,  मां की शरण में आजा रे
टूट जाए सांसो की माला  , कब किसने यह जाना रे
कांटो को मां कलियाँ करती, विष को अमृत करती है 
अज्ञान अंधेरा मिट जाता  , ज्ञान की जोती जगती है 
जिसके सिर हो मां का साया, वो न कभी घबराता है 
मन दर्पण निर्मल हो जाता,  पाप से मुक्ति पाता है
देवो ने गाई अमृतवाणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

12 धामनगांव, मोहटा मे, मां का मंदिर प्यारा है 
सौदंति मे मां यल्लमा, काली रूप धारा है   
खंडवा बुरहानपुर  मे, मां की मूरत प्यारी है 
माहूरगढ़ मे ये जगदंबा, सबकी तारनहारी है 
छावल उत्तरकाशी, जो भी भक्त जाते है 
दर्शन करके माता को, मन चाहा वर पाते है
औरंगाबाद पातुर मे,मां की शान निराली है 
पठानकोट और चिखली मे, मां से होली दिवाली है
डोंगर में ये है इकवीरा, सबकी विपदा हरती है 
जलालाबाद  बिसनूर मे, मां सुख की बरखा करती है 
जानापांव चांदबड़  मे, जो जयकारे गाते है
भक्तों के सब दुर्गम काज, पल मे सुगम हो जाते है  
सारी दुनिया मां की दिवानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

गीतकार - कीर्ति पाहूजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी



हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी
सुनकर भक्तों छलक उठेंगे आंखों से पानी 

1----------

परशुराम से एक दिन बोले जमदग्नि मुनिवर 
मानोगे मेरी आज्ञा न होगा कोई प्रश्न उत्तर 
सुनकर न करना इंकार,  पिता का रखना मान 
होगा मेरा तिरस्कार ये बात तू रखना ध्यान 
खेलेगी किस्मत कैसा खेल,  न परशुराम ने जानी
हैं मां रेणुका ____________

2-----------

परशुराम बिन सोचें बोले, निभाऊंगा वचन 
पालन करके आज्ञा का,  होगा मन मेरा उपवन
मुनिवर बोले परशुराम, अपना शस्त्र उठाओ
अपनी तुम माता का शीश धड़ से अलग कर जाओ
पुत्र का हो गया हृदय घात, सुनकर पिता की वाणी 
है मां रेणुका ___________

3----------

यह सोचकर थर-थर कांपे, पुत्र परशुराम 
होगा कैसे काम अनर्थ, चरण है जिनके धाम
मन ही मन में बह रही, अश्रु की तेज धारा
इस विधि के विधान ने यह क्या लिख डाला 
वक्त के आगे हार गए,  बड़े बड़े महाज्ञानी 
है मां रेणुका ____________

4------------

जीवन बन गई एक पहेली, कैसे सुलझाऊं
मां के मैं प्राण बचाऊं,या दिया वचन निभाऊं
मुझको मां करना क्षमा,  हालात से मजबूर 
हो जाएगा घोर पाप क्या था मेरा कसूर
उठाया शस्त्र मां के प्रति,  पिता की आज्ञा मानी
हैं मां रेणुका परशुराम _____________

5--------------

परशुराम से मुनिवर बोले,  मैं हूँ अति प्रसन्न
क्षण भर भी देर न की, पूरा तुमने किया वचन 
पितृ भक्ति बड़ी महान्,  मांगो तुम वरदान 
सुनलो पिता करुण पुकार, दो मां को जीवनदान 
बस यही है विनती मेरी,  करदो मेहरबानी 
हैं मां रेणुका परशुराम ____________

6-------------

परशुराम मां रेणुका की,  दे ये सीख घटना 
विवाद मातृ पितृ का बिन जाने पक्षन तोलना
सोचें समझें न देना तुम कोई भी वचन 
बाद मे पछताओगे,  न लौटेगा वो क्षण 
गांठ बांध लो भक्तों ना करना कभी नादानी 
हैं मां रेणुका परशुराम-----------

गीतकार - कीर्ति पाहुजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

रविवार, 5 जनवरी 2020

चला फरसा श्री परशुराम का



ना डर है किसी भी अंजाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
है विष्णु के अवतारी
करे क्रोध भयंकर भारी
डंका बजता ( 3) है  इनके नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

1) जमदारा से गए कैलाश , परशुराम शिव के पास
शिव से विद्या शक्ति पाए , फिर वो जमादारा आये
परशुराम आश्रम आये , वो पिता से आदेश पाए
कांटो शीश अपनी माता का , ना टाला आदेश पिता का
नहि पूछे वो 2 कारण इस काम
चला फरसा श्री परशुराम का

2) अगले पल छाया सन्नाटा ,शीश अपनी माता का काँटा
    साबित परशुराम ने कर दी , अपनी सच्ची पितृ भक्ति
   बोले पिता है परशुराम , मांगो जो चाहे वरदान
    सच्ची मेरी पितृ भक्ति , दों भाई को श्राप मुक्ति
   दान माँ मैं 2 माँ के जीवनदान का
    चला फरसा श्री परशुराम का

3) रेणुका जमदग्नि के बीच , शक की दीवार डाली खीच
सहस्त्रअर्जुन ने शक करवाया , गुस्सा परशुराम को आया
नैनुका अपने पति की जान , परशुराम से मांगे दान
परशुराम दे जीवनदान , नैनुका के बेटे बेईमान
कर दी हत्या जमदग्नि की , कामधेनु ना देने का इंतकाम था
चला फरसा श्री परशुराम का

4) माँ रेणुका शोक मनाये , परशुराम को बतलाए
सहस्त्रअर्जुन के बेटे सारे , तेरे पिता के है हत्यारे
रेणुका माँ को दुःख अपार , छाती पिटी 21 बार
परशुराम भरे ललकार , माई मैं भी 21बार
हाँ मिटा दूंगा 2 वंश छत्रियो के नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

5) जमादारा महू निराला , इनका इतिहास मतवाला
यहां धरती के नीचे जाकर , चुप गए सहस्त्रअर्जुन आकर
कोई जतन काम ना आये , परशुराम से बच ना पाए
परशुराम ने पलटी धरती , हत्या उस राजा की कर दी
हाँ हुआ जश्न सर पे इंतकाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
गीतकार - जयंत सांखला ( देवास )