मुझे मेरे मुस्किल का - 2, हल मिल गया है !
माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है !
मिटणे लगी है चिंता मन की. ढाल बनी माँ घर आंगण की !
भक्तों को भक्ति का - 2, फल मिल गया है !
कोण है खुश किस आँख मे पानी, माँ तो जाने सबकी कहानी!
मैया के चरणों का - 2, घर मिल गया है!
माँ को पास मे ले आयेंगी, प्रार्थना खाली ना जाएंगी !
भक्ती के गीत को - 2, असर मिल गया है!
दुःख मे साथी चंद मिलते है , हर दरवाज़े बंद मिलते है!
हरपल खुला माँ का - 2, दर मिल गया है!
मुस्किल कुछ नहीं तेरे लिये माँ, तू ही सब कुछ मेरे लिये!
जिंदगी के नाव को - 2, सफर मिल गया है!
दुर्गाप्रसाद को देता सहारा, स्वर्ग से साचा द्वार तुम्हारा !
जयंत को आने वाला - 2, कल मिल गया है!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें