गुरुवार, 9 जुलाई 2020

माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है - भजन गायक रवि सोनी

मुझे मेरे मुस्किल का - 2, हल मिल गया है ! 
माँ विंध्यवासिनी का दर मिल गया है !

मिटणे लगी है चिंता मन की. ढाल बनी माँ घर आंगण की !
भक्तों को भक्ति का - 2, फल मिल गया है !

कोण है खुश किस आँख मे पानी, माँ तो जाने सबकी कहानी!
मैया के चरणों का - 2, घर मिल गया है!

माँ को पास मे ले आयेंगी, प्रार्थना खाली ना जाएंगी ! 
भक्ती के गीत को - 2, असर मिल गया है! 

दुःख मे साथी चंद मिलते है , हर दरवाज़े बंद मिलते है!
हरपल खुला माँ का - 2, दर मिल गया है!

मुस्किल कुछ नहीं तेरे लिये माँ, तू ही सब कुछ मेरे लिये! 
जिंदगी के नाव को - 2, सफर मिल गया है! 

दुर्गाप्रसाद को देता सहारा, स्वर्ग से साचा द्वार तुम्हारा ! 
जयंत को आने वाला - 2, कल मिल गया है!

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