मेहँदी गाव मे सजा है दरबार, भगत आये दूर दूर से-2
हो बैठी विंध्यवासिनी मैया आसन मार, भगत आये दूर दूर से
1_पेंच नदी किनारे बसा ये, मेहंदी गाव निराला
भक्तों को मन मोहक लगे, मैया तेरा दिवाला
झंडा लहर लहर लहराया , किसने मंदिर तेरा बनाया
हो किया हम भक्तों पे बड़ा उपकार, भगत आये दूर दूर से....
2_ग्रामवासियों ने मिलकर के, मंदिर भव्य बनाया
शाकम्भरी नवरात्री शुभ दिन, तोरण द्वार सजाया
माँ का करके अर्चन वंदन, शिव के प्राथ्रीक लिंग का पूजन
हो सतचंडी यज्ञ किया है अपार, भगत आये दूर दूर से......
3_शोभा यात्रा निकली माँ की, भक्तन भीड़ है भारी
घट स्थापन कर भक्तों ने, बोले जय जय कारी
पूजे सात दीप नौ खंड, ज्योति प्रज्वलित माँ की अखंड
हो किया मैया जी का भक्तों ने शृंगार, भगत आये दूर दूर से...
4_दूज तीज और चौथ पंचमी, भक्तन ने जल ढारे
छटे सप्तमी तिथि अष्टमी, माँ के निकले जवारे
हवन पूजन कर आरती वंदन, सबको तिलक लगाके चंदन
हो कन्या भोजन का लगाया भंडार, भगत आये दूर दूर से...
5_नवमी तिथि विसर्जन बेला, माँ के निकले जवारे
कासी टेकडी पेंच नदी के, पोहचे घाट किनारे
माँ का लेकर आशीर्वाद, भक्तों पाओ महाप्रसाद
हो कल कल कर ती जाये पेंच नदी की धार, भगत आये दूर दूर से...
6_शाकम्भरी नवरात्री तबसे, भक्त यहा है मनाते
विंध्यवासिनी माँ के दर से, मनकी मनोती पाते
करलो भजन कीर्तन गान, जीवन का करने कल्याण
हो बाजे ढोल नगाड़े मैया जी के द्वार, भगत आये दूर दूर से
7_मेहंदी गाव की गाथा लिखकर, मन मेरा हरसाया
दुर्गाप्रसाद धनोले जी ने, सारा हाल सुनाया
विनती करता है बेनाम, बुलवा ले माँ अपने धाम
हों मनकी मनसा माँ करले स्विकार,भगत आये दूर दूर से
हो बैठी विंध्यवासिनी मैया आसन मार, भगत आये दूर दूर से
1_पेंच नदी किनारे बसा ये, मेहंदी गाव निराला
भक्तों को मन मोहक लगे, मैया तेरा दिवाला
झंडा लहर लहर लहराया , किसने मंदिर तेरा बनाया
हो किया हम भक्तों पे बड़ा उपकार, भगत आये दूर दूर से....
2_ग्रामवासियों ने मिलकर के, मंदिर भव्य बनाया
शाकम्भरी नवरात्री शुभ दिन, तोरण द्वार सजाया
माँ का करके अर्चन वंदन, शिव के प्राथ्रीक लिंग का पूजन
हो सतचंडी यज्ञ किया है अपार, भगत आये दूर दूर से......
3_शोभा यात्रा निकली माँ की, भक्तन भीड़ है भारी
घट स्थापन कर भक्तों ने, बोले जय जय कारी
पूजे सात दीप नौ खंड, ज्योति प्रज्वलित माँ की अखंड
हो किया मैया जी का भक्तों ने शृंगार, भगत आये दूर दूर से...
4_दूज तीज और चौथ पंचमी, भक्तन ने जल ढारे
छटे सप्तमी तिथि अष्टमी, माँ के निकले जवारे
हवन पूजन कर आरती वंदन, सबको तिलक लगाके चंदन
हो कन्या भोजन का लगाया भंडार, भगत आये दूर दूर से...
5_नवमी तिथि विसर्जन बेला, माँ के निकले जवारे
कासी टेकडी पेंच नदी के, पोहचे घाट किनारे
माँ का लेकर आशीर्वाद, भक्तों पाओ महाप्रसाद
हो कल कल कर ती जाये पेंच नदी की धार, भगत आये दूर दूर से...
6_शाकम्भरी नवरात्री तबसे, भक्त यहा है मनाते
विंध्यवासिनी माँ के दर से, मनकी मनोती पाते
करलो भजन कीर्तन गान, जीवन का करने कल्याण
हो बाजे ढोल नगाड़े मैया जी के द्वार, भगत आये दूर दूर से
7_मेहंदी गाव की गाथा लिखकर, मन मेरा हरसाया
दुर्गाप्रसाद धनोले जी ने, सारा हाल सुनाया
विनती करता है बेनाम, बुलवा ले माँ अपने धाम
हों मनकी मनसा माँ करले स्विकार,भगत आये दूर दूर से
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