सोमवार, 27 जनवरी 2020

माँ रेणुका देवी अमृतवाणी

भक्तों तुमने तो अनेक पावन कथा होगी । भोले भंडारी की,  कलकत्ते वाली की,  राधे श्याम की,  सिया राम की । पर जो आज पावन कथा मै तुमको सुनाने जा रहा हूँ वह सबसे भिन्न है, अनुपम है। मां दुर्गा की  अवतारी, मां रेणुका के, अवतरण की कथा बड़ी मनोरम है। तो आओं प्रिय भक्तों मां रेणुका का गुणगान करे।सच्चे मन से उनका ध्यान धरे।

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नमो नमः ×4, 
नमो नमः मां रेणुका × 4
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
पावन तेरी अमृतवाणी,  सबके मां संकट हरो
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

1-------------

जगदंबा की तू अवतारी,  तेरी महिमा न्यारी है 
आदि शक्ति सिद्ध स्वरूपा,  पूजे सृष्टि सारी है
सूरज में मां तेज तुम्हारा,  चंद्र में शीतल छाया है 
कण-कण में मां तेरा जलवा, तेरा रूप ही पाया है 
वृक्ष लता सब पौधे मां,  तुझसे फ़ले फूले है
धरती अम्बर और तारे, तुम बिन मां अधूरे है 
जगमग तेरी जोत नूरानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका × 4
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मां रेणुका का पूर्व जन्म में अदिति था। अदिति शिव जी की उपासक थी । उन्होंने कई वर्षों तक शिव जी की आराधना तपस्या की। अदिति के जप-तप से प्रसन्न होकर शिव जी उन्हें कई वरदान दिए।

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2---------------

पूर्व जनम मे रेणुका ने, नाम अदिति पाया था।
कईं वर्षों तक कर तपस्या शिव भोले को मनाया था ।
राई को पर्वत कर देती,  तू मां बड़ी निराली है।
गागर में सागर भर देती,  तेरी कीर्ति न्यारी है ।
अपनी ममता का खजाना,  भक्तों पे लुटाती हो ।
जो भी तुझको शीश झुकाता, उसकी बिगड़ी बनाती हो ।
सब पर है तेरी मेहरबानी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

माँ रेणुका ने पूर्व जन्म  अदिति रूप में कई वरदान प्राप्त किए। पहला वरदान उनको यह मिला कि प्रभु हरि का छठवां अवतार तुम्हारी कोख से जन्म होगा ।
जग मे तुम्हारी अत्यधिक  मान- प्रतिष्ठा  होगी।  तुम्हे इकवीरा के नाम से भी जाना जाएगा ।

3------------

शिव से वर माँ तुमने पाया , जग में मान पाओगी 
प्रभू हरी ले कोख से जन्म , इकवीरा कहलाओगी 
दुखियों के तू कष्ट निवारे , तू माँ सुखदाई है 
भवसिंधु से पार उतारे , सबकी तू सहाई है 
जीवन में हो जितनी उलझन , उसको तुम सुलझाती हो 
जो माँ तेरा ध्यान धरे , संकट से उसे बचाती हो 
तेरी शक्ति सबने मानी , मां रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4
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मां रेणुका का जन्म इक्ष्वाकु वंशीय राजा रेणु के महल में हुआ । राजा रेणु की दो पुत्रीया थी ,  रेणुका और बेणुका। दोनो पुत्री रूपमती थी। राजा को अपनी धन दौलत का अहंकार था। एक दिन राजा ने अपनी पुत्रियों से प्रश्न किया कि तुम किसका दिया खाती हो। बेणुका के उत्तर से राजा रेणु अत्यधिक प्रसन्न हुए क्योंकि बेणुका ने कहा पिताजी मैं आपका दिया खाती हूँ । पर रेणुका का उत्तर सुनकर अत्यधिक क्रोधित हुए क्योंकि रेणुका ने कहा पिताजी मैं परमात्मा का दिया हुआ अपने नसीब का खाती हूँ ।प्रतिकार स्वरूप राजा ने बेणुका का विवाह पराक्रमी राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन से किया और रेणुका का विवाह निर्धन तपस्वी भृगुवंशीय मुनि जमदग्नि से किया ।

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राजा रेणु की तू पुत्री,  जमदग्नि तेरे स्वामी है 
घट घट में मां तू समाई, तू मां अन्तर्यामी है
तू चाहे तो बंजर मे, हरियाली लहराती है 
सूखे सरवर मे भी मां,  तू ही फूल खिलाती है
पत्थर को पारस कर देती,  तेरी शक्ति अपार है
जो मां तेरी माला जपता, उसका मां उद्धार है
जग कहता तुमको कल्याणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

अदिति को शिव जी से  दूसरा वरदान यह मिला कि कलयुग में तुम्हे महादेवी के रूप मे पहचाना जाएगा ।
कुल देवी के रूप मे तुम्हारी पूजा की जाएगी । तुम्हे कुल स्वामी भी कहा जाएगा ।तुम्हारी आराधना करने से विधवा भी सुहागन हो जाएगी। तुम सदा नारी की लाज बजाओगी। तुम सबकी मनोकामना पूर्ण करोगी।

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कलयुग में देवी की देवी , मैया तुम कहाती हो 
कुलदेवी के रूप में माँ , तुम तो पूजी जाती हो 
सतियों के तु सत संवारे , सबकी लाज बचाती  है 
विधवा को तु मंगली करती ,आस का दीप जगाती है
मंगल करती सारे काज , अमंगल तुम हरती हो 
जो माँ करता तेरा पाठ , कामना पूरी करती हो 
जग में ना तुमसा वरदानी,मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी,  मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

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मां रेणुका को पांच पुत्रो की प्राप्ति हुई । शिव जी के वरदान अनुसार पांचवे पुत्र परशुराम जो प्रभु हरि के छठवे अवतार के रूप मे जाने जाते है। उनका जन्म वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हुआ था। जिस तिथि को अक्षय तृतीया के नाम से भी जाना जाता है ।परशुराम तेजस्वी  पराक्रमी थे।

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परशुराम की तू है माता , सबकी तू हितकारी है
लाचारो को देती सहारा , भक्तों को रखवाली है 
सुखे नीरज जीवन में माँ , तुम ही बहार लाती हो
गम के बादल दूर भगाती , खुशियाँ तुम बरसाती हो
करुणा की माँ निर्मल धारा , तेरे चरणो बहती है 
करता जो माँ तेरा चिंतन , उसे न चिंता रहती है
तुमको सेवत ब्रम्हाज्ञानी  ..माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  ×4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

मां रेणुका को अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है । अन्नपूर्णा माता का हृदय सागर से भी विशाल है । अन्नपूर्णा माता की कृपा से सबके भंडार भरे रहते हैं । माता की दया दृष्टि जिस पर हो वो कभी भूखा नही सो सकता । माता पल भर मे ही निर्धन को धनवान बना देती है । अन्नपूर्णा मां के चरणो मे मेरा कोटि कोटि प्रणाम ।

(बोलो रेणुका माता की जय)

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अन्नपूर्णा रूप तुम्हारा , जग का पालन करती हो
अन्न धन के सबके माता , तुम भण्डार भरती हो
भुक्षुक को सम्राट बना दे , तेरी अजब ये माया है
निर्बल को दे अपना बल , प्रेम सुधा बरसाया है 
तेरा जो अर्चन करता, वो सुख समृद्धि पाता है 
आनन्द वैभव देने वाली , कर्ज से मुक्त हो जाता है 
तु हि माँ सम्पति की दानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4

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रेणुका झील की गाथा बड़ी पावन है। प्रबोधिनी एकादशी की पूर्व संध्या पर यहाँ मेला भराता है। कहां जाता  हैं कि भगवान परशुराम अपनी मां रेणुका से आशीर्वाद लेने यहाँ आते हैं। माता और पुत्र को समर्पित यह मेला पूरे विश्व में अनूठा कहा जाता है। यहां रेणुका झील के किनारे भगवान परशुराम एवं मां रेणुका का मंदिर भी स्थित है। 


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हिमाचल में झील रेणुका, जिसकी पावन गाथा है 
दोष रोग से मुक्त हो जाता, जो भी डुबकी लगाता है
तेरे माता इशारे से , कंकर मोती बनते है 
रेगिस्तान में भी माँ , उपवन ख़ूब महकते है 
सुख का होता नया सवेरा , दुःख की शाम ढलती है 
श्रध्दा सुमन जो अर्पण करता , उसकी झोली भरती  है
देरी गाथा वेद बखानी , माँ रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

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मां रेणुका के देश भर मे कई शक्ति पीठ है। मां का रूप अति सुन्दर है। मां रेणुका के दर्शन मात्र से ही मन प्रफुल्लित हो जाता है,  सुख शांति का आभास होता है ,जीवन संवर जाता है । तीनों लोक मे माता का गुणगान होता है। मां की पावन जोत से तीनो लोको मे उजाला फैला हुआ है। जो भक्त माता का पूजन अर्चन करता है। वो भव सागर से तर जाता है ।

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चन्द्र सा तेरा रूप चमके,  मुख माँ बड़ा विशाल है 
नयन है तेरे मोटे लाल , बोंहें माँ विकराल है 
तेरा दर्शन जो भी करता, भव से वो तर जाता है 
लाख चौरासी योनियों से , वो माँ मोक्ष पाता है 
विकट डगर में माँ रेणुका , जिसने तुम्हे पुकारा  है
जीवन के पग पग में माँ ,  तूने उसे संभाला है
सिमरन करते सारे प्राणी, माँ रेणुका कृपा करो
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  × 4 

परशुराम ने विवश होकर अपने पिता की आज्ञा का पालन किया ।उन्होंने अपनी माँ रेणुका का शीश धड़ से अलग कर दिया । परशुराम के पिता जमदग्नि मुनिवर पुत्र की आज्ञा के पालन अति प्रसन्न हुए । जमदग्नि मुनिवर ने फ  स्वरूप उनको वरदान मांगने को कहा  तो परशुराम वरदान स्वरूप कुछ भी मांग सकते थे। पर माँ तो माँ होती है और माँ का स्थान इस जग मे कोई दूजा नही पा सकता। इसलिए परशुराम ने वरदान मे अपनी माँ रेणुका का पुनर्जीवन मांगा। जमदग्नि मुनिवर ने परशुराम की इच्छा पूर्ण की और माँ रेणुका को पुनर्जीवन दिया । जमदारा की दैविक भूमि पर यह घटना घटित हुई । माँ रेणुका के बहते रक्त ने पाषण का रूप धर लिया । और आज यहाँ  माँ रेणुका की भव्य मंदिर सजा हुआ है। दूर-दूर से भक्त श्रद्धालु माँ के दर्शन के लिए आते हैं । और इच्छा फल प्राप्त करते हैं 


10------------------

होकर परशुराम विवश, अपना वचन निभाते हैं 
अपनी माँ का शीश धड़ से , खुद ही अलग कर जाते है
माता के बहते रक्त ने,  वहां पत्थर रूप धारा है 
धन्य हो गई वो धरती,  जहाँ मां का मंदिर प्यारा है 
माटी को चंदन कर देती,  लोहा कंचन करती हैं 
करता जो  ही मां का किरतन, किस्मत उसकी बदलती है 
तेरी लीला सबने जानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

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मां रेणुका का हृदय कोमल है। वह अपने भक्तों पर, बच्चों पर अपार ममता लुटाती है। जो इनकी शरण मे आ जाता है उसे हर संकट से बचाती है। हे प्राणी मोहमाया से छूटकर मां की लगन लगाले। अपने जीवन की डोर मां को सौंप दे।  तेरे जीवन कश्ती की पतवार है मां । वो तुझे कभी बींच भंवर मे न डोलने देगी। अपना संपूर्ण जीवन मां की सेवा मे लगाले।

11--------------------

इधर उधर क्यूँ भटकें प्राणी,  मां की शरण में आजा रे
टूट जाए सांसो की माला  , कब किसने यह जाना रे
कांटो को मां कलियाँ करती, विष को अमृत करती है 
अज्ञान अंधेरा मिट जाता  , ज्ञान की जोती जगती है 
जिसके सिर हो मां का साया, वो न कभी घबराता है 
मन दर्पण निर्मल हो जाता,  पाप से मुक्ति पाता है
देवो ने गाई अमृतवाणी,  मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः ×4
नमो नमः मां रेणुका ×4

12 धामनगांव, मोहटा मे, मां का मंदिर प्यारा है 
सौदंति मे मां यल्लमा, काली रूप धारा है   
खंडवा बुरहानपुर  मे, मां की मूरत प्यारी है 
माहूरगढ़ मे ये जगदंबा, सबकी तारनहारी है 
छावल उत्तरकाशी, जो भी भक्त जाते है 
दर्शन करके माता को, मन चाहा वर पाते है
औरंगाबाद पातुर मे,मां की शान निराली है 
पठानकोट और चिखली मे, मां से होली दिवाली है
डोंगर में ये है इकवीरा, सबकी विपदा हरती है 
जलालाबाद  बिसनूर मे, मां सुख की बरखा करती है 
जानापांव चांदबड़  मे, जो जयकारे गाते है
भक्तों के सब दुर्गम काज, पल मे सुगम हो जाते है  
सारी दुनिया मां की दिवानी, मां रेणुका कृपा करो 
जमदारा की तू महारानी, मां रेणुका कृपा करो 
नमो नमः  × 4
नमो नमः मां रेणुका  ×4

गीतकार - कीर्ति पाहूजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी



हैं मां रेणुका परशुराम की दर्द भरी कहानी
सुनकर भक्तों छलक उठेंगे आंखों से पानी 

1----------

परशुराम से एक दिन बोले जमदग्नि मुनिवर 
मानोगे मेरी आज्ञा न होगा कोई प्रश्न उत्तर 
सुनकर न करना इंकार,  पिता का रखना मान 
होगा मेरा तिरस्कार ये बात तू रखना ध्यान 
खेलेगी किस्मत कैसा खेल,  न परशुराम ने जानी
हैं मां रेणुका ____________

2-----------

परशुराम बिन सोचें बोले, निभाऊंगा वचन 
पालन करके आज्ञा का,  होगा मन मेरा उपवन
मुनिवर बोले परशुराम, अपना शस्त्र उठाओ
अपनी तुम माता का शीश धड़ से अलग कर जाओ
पुत्र का हो गया हृदय घात, सुनकर पिता की वाणी 
है मां रेणुका ___________

3----------

यह सोचकर थर-थर कांपे, पुत्र परशुराम 
होगा कैसे काम अनर्थ, चरण है जिनके धाम
मन ही मन में बह रही, अश्रु की तेज धारा
इस विधि के विधान ने यह क्या लिख डाला 
वक्त के आगे हार गए,  बड़े बड़े महाज्ञानी 
है मां रेणुका ____________

4------------

जीवन बन गई एक पहेली, कैसे सुलझाऊं
मां के मैं प्राण बचाऊं,या दिया वचन निभाऊं
मुझको मां करना क्षमा,  हालात से मजबूर 
हो जाएगा घोर पाप क्या था मेरा कसूर
उठाया शस्त्र मां के प्रति,  पिता की आज्ञा मानी
हैं मां रेणुका परशुराम _____________

5--------------

परशुराम से मुनिवर बोले,  मैं हूँ अति प्रसन्न
क्षण भर भी देर न की, पूरा तुमने किया वचन 
पितृ भक्ति बड़ी महान्,  मांगो तुम वरदान 
सुनलो पिता करुण पुकार, दो मां को जीवनदान 
बस यही है विनती मेरी,  करदो मेहरबानी 
हैं मां रेणुका परशुराम ____________

6-------------

परशुराम मां रेणुका की,  दे ये सीख घटना 
विवाद मातृ पितृ का बिन जाने पक्षन तोलना
सोचें समझें न देना तुम कोई भी वचन 
बाद मे पछताओगे,  न लौटेगा वो क्षण 
गांठ बांध लो भक्तों ना करना कभी नादानी 
हैं मां रेणुका परशुराम-----------

गीतकार - कीर्ति पाहुजा 
स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

रविवार, 5 जनवरी 2020

चला फरसा श्री परशुराम का



ना डर है किसी भी अंजाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
है विष्णु के अवतारी
करे क्रोध भयंकर भारी
डंका बजता ( 3) है  इनके नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

1) जमदारा से गए कैलाश , परशुराम शिव के पास
शिव से विद्या शक्ति पाए , फिर वो जमादारा आये
परशुराम आश्रम आये , वो पिता से आदेश पाए
कांटो शीश अपनी माता का , ना टाला आदेश पिता का
नहि पूछे वो 2 कारण इस काम
चला फरसा श्री परशुराम का

2) अगले पल छाया सन्नाटा ,शीश अपनी माता का काँटा
    साबित परशुराम ने कर दी , अपनी सच्ची पितृ भक्ति
   बोले पिता है परशुराम , मांगो जो चाहे वरदान
    सच्ची मेरी पितृ भक्ति , दों भाई को श्राप मुक्ति
   दान माँ मैं 2 माँ के जीवनदान का
    चला फरसा श्री परशुराम का

3) रेणुका जमदग्नि के बीच , शक की दीवार डाली खीच
सहस्त्रअर्जुन ने शक करवाया , गुस्सा परशुराम को आया
नैनुका अपने पति की जान , परशुराम से मांगे दान
परशुराम दे जीवनदान , नैनुका के बेटे बेईमान
कर दी हत्या जमदग्नि की , कामधेनु ना देने का इंतकाम था
चला फरसा श्री परशुराम का

4) माँ रेणुका शोक मनाये , परशुराम को बतलाए
सहस्त्रअर्जुन के बेटे सारे , तेरे पिता के है हत्यारे
रेणुका माँ को दुःख अपार , छाती पिटी 21 बार
परशुराम भरे ललकार , माई मैं भी 21बार
हाँ मिटा दूंगा 2 वंश छत्रियो के नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

5) जमादारा महू निराला , इनका इतिहास मतवाला
यहां धरती के नीचे जाकर , चुप गए सहस्त्रअर्जुन आकर
कोई जतन काम ना आये , परशुराम से बच ना पाए
परशुराम ने पलटी धरती , हत्या उस राजा की कर दी
हाँ हुआ जश्न सर पे इंतकाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
गीतकार - जयंत सांखला ( देवास )

आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

ठंडी ठंडी रुत मनभावन मौसम प्यारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

     अंतरा पहला
चूड़ी कंगन पायल बिछिया, लाये कोई बिंदिया
कोई सुंदर हार लिए  है, कोई चढाये चुनरिया।
बिछा के पलकें भक्तों ने, तेरी राह निहारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

दूसरा अंतरा
अमुवा की डाली पे तुम्हारा, झूला बनाएंगे
वंदन करने को चंदन का, चौक सजाएंगे
यहां पे मैया देखो तो, क्या अजब नजारा है
आ जाना यहां रेणुका माता, ये जमदारा है

अंतरा तीसरा
तेरे दर्शन से जन्मों की, प्यास बुझाना है
छप्पन भोग का तुमको, मैया भोग चढ़ाना है
करें निरंजन दर्शन हम , सौभाग्य हमारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है


चौथा अंतरा
कुल देवी हैं रेणुका मां , और शान हमारी है
स्वर्ग सी लागे ये भूमि , मां की बलिहारी है
जहां पै बहती सिंधु की , पावन जल धारा है
आ जाना यहां रेणुका माता , ये जमदारा है

गीतकार - निरंजन सेन
स्थान  - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है


खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है
नहीं और है कोई मां रेणुका माता है

                      सेर (1)
रहती है धूम बड़ी भारी,माता की जय जय गाते हैं मंदिर को खूब सजाते हैं , भक्ति में हम खो जाते इक्कीस  अगस्त का इंतजार , हमएक साल से करते हैं
यह तिथि है मां के जन्मदिन की ,हम मां का जश्न मनाते
                    
                            अंतरा
१)मॉ दिखलाये जल्वा ,ये ऐसा मंदिर है ये शक्तिपीठ हमे ,लगे स्वर्ग सा सुंदर है
प्यारा है गांव धामन ,तीरथ बन जाता है
खुशियों से जहां .  .      .......... 

                        सेर-(2)
लेकर के धर्म का नाम कुछ लोग अधर्म जो करते  कलयुग के बगला भगत हैं ये अंजाम से भी नही डरते हैं
मानवता मर्यादा भूले और अहंकार में डूबे हैं
सबके दिल मे मॉ प्रेम जगा, तेरे दुखी भक्त ये कहते हैं

                  अऩ्तरा-2
ढोंगी बाबाओं से भक्तों को बचा ले मां
कुछ भक्त भी हैं ढोगी ,तु उनको सजा दे मॉ
तु अंतर्यामी है, तू जग कि ग्याता है
              खुशियो से जहॉ.......
             
                         सेर-3
हर वर्ष यहां पर ,पॉच दिनों घट की स्थापना होती है
औऱ पॉच दिनो तक भक्तो की ,बडी कड़ी साधना होती है
कल तक जो एक भिखारी था इस दर से बऩा उद्योगपति
वर उसको वैसा ही देती मां जिसकी जो भावना होती है

                  अंतरा :- 3
हर चैत के महीने में रहता है बड़ा मेला होती है भीड यहां भक्तों का मचा रेला
निरंजन जो आता है ,वह पुण्य कमाता है
         खुशियों से जहां......

अभिलेखागार के उद्यान से चली मैया सवारी बड़े शान से


अभिलेखागार के उद्यान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से-२
भक्तो का जत्था प्यारा
तेरा करते हुए जयकारा २
गुंजी गलियां -२  तेरे गुणगान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
   अभिलेखागार .............

१)हो गयी दुनिया ये दीवानी
तुमको पाकर अंबे रानी
होवे नगर-नगर अगवानी
  तेरी रेणुका भवानी
हो मैं भी नचदी-२  पिरा बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
        अभिलेखागार के .........

२)रेणुकाखापा , सीताढाना
  तेरी भक्ति का दीवाना
ले के पालकी तुम्हारी
आये तेरे अस्थाना
उदो-उदो २  पुकारे बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
                अभिलेखागार के...........

३) माता को मंदिर में लाके
  रोली चंदन तिलक लगाके
भक्ता झूम झूम के गा के
कहता है बेनाम सुना के
तुमको पूजू  २ भवानी दिलो जान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से                                         
             अभिलेखागार के ...........

सांचा द्वारा धामनगांव का


सॉचा दुवारा धामन गांव का
जग से न्यारा धामन गांव का -२
मै नंगे नंगे पग आऊंगी
मैया तेरे अंगना में नच-नच गाऊंगी

१) दुखियों के दुख हरने वाली
खाली  झोली भरने वाली
मन मेरा लागा मैया तेरे भजन में
मुझको लगा लो मैया अपनी शरण में
ऩित ज्योत जगाऊंगी%
मैया तेरे अंगना में........

२) भृगु वंश की जननी माता
  तुम हो सुख संपत्ति की दाता
  बांझन खिलाएं गोदी में ललनवा
  बाजे बधाई मैया तेरे अंगनवा
में बलि-बलि जाऊंगी % मैया तेरे अँगना...

३) मां की मूरत मन को भाती
  तेरी ज्योत जले दिन राती
सोलह सिंगार लाई ,लाई चुनरिया
  बेनाम दर्शन की प्यासी नजरिया
कब दर्शन पाऊंगी % मैया तेरे अंगना