रविवार, 5 जनवरी 2020

चला फरसा श्री परशुराम का



ना डर है किसी भी अंजाम का
चला फरसा श्री परशुराम का
है विष्णु के अवतारी
करे क्रोध भयंकर भारी
डंका बजता ( 3) है  इनके नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

1) जमदारा से गए कैलाश , परशुराम शिव के पास
शिव से विद्या शक्ति पाए , फिर वो जमादारा आये
परशुराम आश्रम आये , वो पिता से आदेश पाए
कांटो शीश अपनी माता का , ना टाला आदेश पिता का
नहि पूछे वो 2 कारण इस काम
चला फरसा श्री परशुराम का

2) अगले पल छाया सन्नाटा ,शीश अपनी माता का काँटा
    साबित परशुराम ने कर दी , अपनी सच्ची पितृ भक्ति
   बोले पिता है परशुराम , मांगो जो चाहे वरदान
    सच्ची मेरी पितृ भक्ति , दों भाई को श्राप मुक्ति
   दान माँ मैं 2 माँ के जीवनदान का
    चला फरसा श्री परशुराम का

3) रेणुका जमदग्नि के बीच , शक की दीवार डाली खीच
सहस्त्रअर्जुन ने शक करवाया , गुस्सा परशुराम को आया
नैनुका अपने पति की जान , परशुराम से मांगे दान
परशुराम दे जीवनदान , नैनुका के बेटे बेईमान
कर दी हत्या जमदग्नि की , कामधेनु ना देने का इंतकाम था
चला फरसा श्री परशुराम का

4) माँ रेणुका शोक मनाये , परशुराम को बतलाए
सहस्त्रअर्जुन के बेटे सारे , तेरे पिता के है हत्यारे
रेणुका माँ को दुःख अपार , छाती पिटी 21 बार
परशुराम भरे ललकार , माई मैं भी 21बार
हाँ मिटा दूंगा 2 वंश छत्रियो के नाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

5) जमादारा महू निराला , इनका इतिहास मतवाला
यहां धरती के नीचे जाकर , चुप गए सहस्त्रअर्जुन आकर
कोई जतन काम ना आये , परशुराम से बच ना पाए
परशुराम ने पलटी धरती , हत्या उस राजा की कर दी
हाँ हुआ जश्न सर पे इंतकाम का
चला फरसा श्री परशुराम का

स्थान - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर
गीतकार - जयंत सांखला ( देवास )

आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

ठंडी ठंडी रुत मनभावन मौसम प्यारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

     अंतरा पहला
चूड़ी कंगन पायल बिछिया, लाये कोई बिंदिया
कोई सुंदर हार लिए  है, कोई चढाये चुनरिया।
बिछा के पलकें भक्तों ने, तेरी राह निहारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है

दूसरा अंतरा
अमुवा की डाली पे तुम्हारा, झूला बनाएंगे
वंदन करने को चंदन का, चौक सजाएंगे
यहां पे मैया देखो तो, क्या अजब नजारा है
आ जाना यहां रेणुका माता, ये जमदारा है

अंतरा तीसरा
तेरे दर्शन से जन्मों की, प्यास बुझाना है
छप्पन भोग का तुमको, मैया भोग चढ़ाना है
करें निरंजन दर्शन हम , सौभाग्य हमारा है
आ जाना यहां रेणुका माता ये जमदारा है


चौथा अंतरा
कुल देवी हैं रेणुका मां , और शान हमारी है
स्वर्ग सी लागे ये भूमि , मां की बलिहारी है
जहां पै बहती सिंधु की , पावन जल धारा है
आ जाना यहां रेणुका माता , ये जमदारा है

गीतकार - निरंजन सेन
स्थान  - माँ रेणुका मन्दिर जमदारा भिण्ड मप्र .
सहयोग - शिवेन्द्र सिंग गुर्जर
संकलनकर्ता - रविन्द्र मानकर

खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है


खुशियों से जहां सब का दामन भर जाता है
नहीं और है कोई मां रेणुका माता है

                      सेर (1)
रहती है धूम बड़ी भारी,माता की जय जय गाते हैं मंदिर को खूब सजाते हैं , भक्ति में हम खो जाते इक्कीस  अगस्त का इंतजार , हमएक साल से करते हैं
यह तिथि है मां के जन्मदिन की ,हम मां का जश्न मनाते
                    
                            अंतरा
१)मॉ दिखलाये जल्वा ,ये ऐसा मंदिर है ये शक्तिपीठ हमे ,लगे स्वर्ग सा सुंदर है
प्यारा है गांव धामन ,तीरथ बन जाता है
खुशियों से जहां .  .      .......... 

                        सेर-(2)
लेकर के धर्म का नाम कुछ लोग अधर्म जो करते  कलयुग के बगला भगत हैं ये अंजाम से भी नही डरते हैं
मानवता मर्यादा भूले और अहंकार में डूबे हैं
सबके दिल मे मॉ प्रेम जगा, तेरे दुखी भक्त ये कहते हैं

                  अऩ्तरा-2
ढोंगी बाबाओं से भक्तों को बचा ले मां
कुछ भक्त भी हैं ढोगी ,तु उनको सजा दे मॉ
तु अंतर्यामी है, तू जग कि ग्याता है
              खुशियो से जहॉ.......
             
                         सेर-3
हर वर्ष यहां पर ,पॉच दिनों घट की स्थापना होती है
औऱ पॉच दिनो तक भक्तो की ,बडी कड़ी साधना होती है
कल तक जो एक भिखारी था इस दर से बऩा उद्योगपति
वर उसको वैसा ही देती मां जिसकी जो भावना होती है

                  अंतरा :- 3
हर चैत के महीने में रहता है बड़ा मेला होती है भीड यहां भक्तों का मचा रेला
निरंजन जो आता है ,वह पुण्य कमाता है
         खुशियों से जहां......

अभिलेखागार के उद्यान से चली मैया सवारी बड़े शान से


अभिलेखागार के उद्यान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से-२
भक्तो का जत्था प्यारा
तेरा करते हुए जयकारा २
गुंजी गलियां -२  तेरे गुणगान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
   अभिलेखागार .............

१)हो गयी दुनिया ये दीवानी
तुमको पाकर अंबे रानी
होवे नगर-नगर अगवानी
  तेरी रेणुका भवानी
हो मैं भी नचदी-२  पिरा बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
        अभिलेखागार के .........

२)रेणुकाखापा , सीताढाना
  तेरी भक्ति का दीवाना
ले के पालकी तुम्हारी
आये तेरे अस्थाना
उदो-उदो २  पुकारे बड़े अरमान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से
                अभिलेखागार के...........

३) माता को मंदिर में लाके
  रोली चंदन तिलक लगाके
भक्ता झूम झूम के गा के
कहता है बेनाम सुना के
तुमको पूजू  २ भवानी दिलो जान से
चली मैया की सवारी बड़े शान से                                         
             अभिलेखागार के ...........

सांचा द्वारा धामनगांव का


सॉचा दुवारा धामन गांव का
जग से न्यारा धामन गांव का -२
मै नंगे नंगे पग आऊंगी
मैया तेरे अंगना में नच-नच गाऊंगी

१) दुखियों के दुख हरने वाली
खाली  झोली भरने वाली
मन मेरा लागा मैया तेरे भजन में
मुझको लगा लो मैया अपनी शरण में
ऩित ज्योत जगाऊंगी%
मैया तेरे अंगना में........

२) भृगु वंश की जननी माता
  तुम हो सुख संपत्ति की दाता
  बांझन खिलाएं गोदी में ललनवा
  बाजे बधाई मैया तेरे अंगनवा
में बलि-बलि जाऊंगी % मैया तेरे अँगना...

३) मां की मूरत मन को भाती
  तेरी ज्योत जले दिन राती
सोलह सिंगार लाई ,लाई चुनरिया
  बेनाम दर्शन की प्यासी नजरिया
कब दर्शन पाऊंगी % मैया तेरे अंगना

आओ चले मां का जन्मदिन मनाए


दिन है खुशी का झूम झूम गाए
आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

१) 31तारीख का दिन आया सरकारी फरमान सुनाया
   रेणुका भवानी २  का डोला उठाएं
        आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

२)माघ महीना पावन बेला ,लागा धामन गांव में मेला           
  बैतूल नगरी से २ मां को ले आए 
   आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं

३)गौ माता के रूप में आई भक्तों के हैं भाग जगाई  
जिसने भी मां के२ दर्शन है पाये
  आवो चलो मां का जन्मदिन मनाएं

४) माँ ने कन्या रूप दिखाकर
   हाथन दे गई पुड़िया पकाकर
   आज किसी भूखे को २  भोजन कराये
    आओ चले माँ का जन्मदिन मनाये

५)जन्मी है जग जननी माता जो है सुख संपत्ति की दाता
बेनाम महिमा वरनी न जाए
  आओ चलो मां का जन्मदिन मनाएं
दिन है खुशी का २,झुम झुम गाये
आओ चलो मां का जन्मदिन

आये मां के नवराते , रेणुका मां के द्वारे


आये माँ के नवराते , झूमते नचते गाते 
रेणुका माँ के द्वारे , आये हम हर्ष मनाते
मन का मयूरा कहा खो गया
तेरे दर आके जाने माँ क्या हो गया
    रेणुका माँ माँ माँ रेणुका माँ माँ माँ  रेणुका माँ रेणुका
(1)      सच गई धामनगाँव की गलियाँ   
     F    खिल गई नवराते मे कलियाँ     
M      उधो उधो कहके तेरी अलख है जगाई रे
          मईया तेरे भक्तो ने ज्योति है जगाई रे
M       हल्दी से तन को रंगा के
         कुमकुम का तिलक लगा के
         जतरा मे तेरी आके खो गया
         तेरे दर आके जाने क्या हो गया
                       रेणुका माँ $ $$
(2)  F    टोलीया देखो सजने लगी है
      M   कौडिया देखो बँटने लगी है
            मेड्या भगत लगाते जय जय कारे
            रेणुका भवानी माँ के आये है द्वारे
       लाये कपास के दाने , हे मईया तुम्हे चढ़ाने
       मनौती माँ को सुनाते खो गया
       तेरे दर आके जाने खो गया
              रेणुका माँ $ रेणुका
(3) M     बूटलिया देखो सजने लगी है
      F     सहनाईया देखो बजने लगी है
           भक्तो की टोली माँ के द्वारे जब आयेगी      MF     कारी कारी काया  उजयारी हो जायेगी
  M    आया बेनाम द्वारे  करते माँ के जयकारे
  F     दुनिया के      खो गया ।
        तेरे दर आके जाने क्या हो गया