खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में
चम्पा में है चण्डी मईया , केसर में बैठी काली
जूही में है छिन्नमस्तीका मोगरे में मोहगढ़ वाली
लाखो दैत्यों कों मारा जिसने बस इक किलकारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी ने हर फुलवारी ने
कमलपुष्प में कमलादेवी ईख में ईच्छापुर वाली
सूरजमुखी में सरस्वती लाजवंती में त्रिपुरारी
घ्यान भक्त कों तारा मां ने ज्वाला किरपानी रे
खेल रही मेरी अम्बा भवानी
धारूल में अम्बा माई , धामन में है रेणुका माई
चौरासी माई पर्वत पर और मुम्बई में मुम्बा माई
भक्त सुधाकर ले लो माँ अपनी शरणागत
खेल रही मेरी अम्बा माई हर पुलवारी में
रंग रंग के फूल खिले तरह तरह कि क्यारी में
खेल रही मेरी अम्बा भवानी हर फूलवारी में
गीतकार - सुधाकर पंडाग्रे ( भोपाल )

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें