मेरी ताप्ती माई ,
बुलाओ तट पर मूझे
पलछिन पड़े ना राहिये
मेरी ताप्ती माई
कर दों दया की नजरिया
माँ चुनरिया चढ़ाउंगी
तेरे किनारो मे अपनी
ये चुनरिया उमरिया बिभाउंगी
दूर धाम मुलताई
मेरी ताप्ती माई
बुलाओ तट पर मूझे
तुमसे लगन है लगाई
मेरी ताप्ती माई
तुमसा ना कोई वरदानी
हे भवानी मेरी माँ
काहे की सुध बिसराई ,
मेरी ताप्ती माई
बुलाओ तट पर मूझे
करुणामयी हॊ भवानी ये
जिन्दगानी सवारी हॊ ।
भुल जो हुई दों भवानी
महारानी बिसार दों
बेनाम भूरिया भर
आई मेरी ताप्ती माई
बुलाओ तट पर मूझे
माँ सूर्यपुत्री ताप्ती देवी की महिमा पर तैयार विदाई भजन गोविन्द बेनाम जी ने लिखा है और शहनाज अख्तर जी ने गाया है । वही एक भजन का निदेशन रविन्द्र मानकर ने किया है ।

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